लखीमपुर खीरी। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग उससे निपटने का दावा कर रहा है, लेकिन तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कहीं, डॉक्टर नहीं हैं, तो कहीं संसाधनों का अभाव है। जिला अस्पताल में आईसीयू वार्ड तैयार किया गया है। यहां के चिल्ड्रन वार्ड में 12 बेड अतिरिक्त डलवाए गए हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस ने 10 बेड के आईसीयू वार्ड को दुरुस्त करने की बात कही है, जबकि चिल्ड्रन वार्ड में करीब 12 बेड और डलवाए गए हैं। जिला अस्पताल और सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट लगने की बात कही जा रहा है। सीएमएस का कहना है कि बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में मौजूद संसाधनों से जिला प्रशासन को भी अवगत करा दिया है।
आईसीयू वार्ड में नहीं हैं डॉक्टर
टीबी अस्पताल के पास करीब पांच साल पहले 10 बेड का आईसीयू वार्ड बना, जहां पर टेक्नीशियन और स्टाफ नर्स तैनात कर दिए गए, मगर आज तक डॉक्टर तैनात नहीं हो सके। ऐसे में जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञों के सहारे ही आईसीयू वार्ड संचालित हो रहा है।
बच्चों के लिए माता-पिता को रहना होगा सतर्क
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी वर्मा का कहना हैं कि कोरोना काल में बच्चों को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों को घर से बाहर न जाने दें। पौष्टिक खान पान दें, जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो। बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार के लोग भी घरों में रहें। बाहर से घर आने पर बच्चों से दूर रहें। घर के बड़े लोग जागरूक और सावधानी बरत कर बच्चों को कोरोना मुसीबत से बचा सकते हैं।
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तीसरी लहर को लेकर जो आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए 10 बेड के आईसीयू वार्ड को तैयार कर लिया गया। 10 बेड के चिल्ड्रन वार्ड में करीब 12 बेड और डलवा दिए हैं। आवश्यकता पड़ने पर 10 बेड के कुपोषण वार्ड का भी उपयोग होगा। अस्पताल में दो बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती है। ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम भी शुरू हो गया है।
- डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
सिर्फ 10 बाल रोग विशेषज्ञ
कैसे निपटेंगे तीसरी लहर से
लखीमपुर खीरी। जिला एवं महिला अस्पताल के अलावा जिले भर में 15 सीएचसी हैं। बाल रोग विशेषज्ञों के मामले में जिला अस्पताल में दो, महिला में तीन और 15 सीएचसी में से सिर्फ पांच पर ही बच्चों के डॉक्टर हैं। जबकि जिले में 15 साल तक के बच्चों की संख्या करीब 14 लाख है। जिला अस्पताल के आईसीयू सहित सीएचसी बिजुआ, पलिया, फरधान, मोहम्मदी, बेहजम, फूलबेहड़, नकहा, पसगवां, रमियाबेहड़, निघासन, ईसानगर, बांकेगंज में बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती ही नहीं हुई। ऐसे में बच्चों के संक्रमण की चपेट में आने से इलाज मिलने में दिक्कत होगी।
आईसीयू में सुविधाएं
बेड-10, वेंटिलेटर-10, मॉनीटर-10, इन्फ्यूजन पंप-10, डेफ्रीलेटर- दो, ऑक्सीन सिलिंडर-20 जंबो
स्टाफ नर्स-18, ऑपरेटर-चार, टेक्नीशियन- एक
वार्ड- बेड
चिल्ड्रन - 10
आईसीयू- 10
एनआरसी-10
एसएनसीयू-10 (महिला अस्पताल में सिर्फ नवजात के लिए )
जिले की आबादी- करीब 50 लाख
15 साल तक के बच्चों की संख्या- करीब 14 लाख
कुल कोरोना संक्रमित-23257
एक से दस साल तक के बच्चे- 76211 से 17 साल तक के किशोर- 1775
स्वस्थ हुए- 22732
एक्टिव केस- 355
कोरोना से मौत- 254
सरकारी अस्पताल
जिला अस्पताल- एक
महिला अस्पताल- एक
लखीमपुर नगर में नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र- चार
पुलिस अस्पताल- एक
सीएचसी- 15
पीएचसी-59
उपकेंद्र-386
ईएनटी डॉक्टर नहीं, कैसे पहचानेंगे ब्लैक फंगस के शुरुआती लक्षण
ब्लैक फंगस से जंग जीतने के लिए शासन स्तर से तमाम तैयारियां की जा रही है। मगर, बिना डॉक्टर के इसे हरा पाना मुमकिन नहीं होगा। 50 लाख की आबादी वाले जिले में पर्याप्त डॉक्टर तक नहीं है। जिला अस्पताल में सीएमएस सहित तीन नेत्र सर्जन और एक ऑप्टोमेट्रिस्टि है, मगर सीएचसी पर न तो नेत्र विशेषज्ञ हैं और न ही नाक, कान, गले (ईएनटी) के डॉक्टर। 15 सीएचसी में सिर्फ बिजुआ, मोहम्मदी में ऑप्टोमेट्रिस्टि और पलिया में नेत्र रोग विशेेषज्ञ की तैनाती है, लेकिन इन जगहों पर सिर्फ नेत्र परीक्षण की सुविधा के अलावा अन्य कोई व्यवस्था तक नहीं है। जबकि शेष अन्य सीएचसी पर न डॉक्टर हैं और न ही ऑप्टोमेट्रिस्टि एवं ईएनटी। सीएचसी अधीक्षकों का कहना है कि सीएचसी पर आज तक नाक, कान एवं गला विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती ही नहीं हुई।