फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lakhimpur Kheri News: अपने ही सियासी पते की तलाश में धौरहरा

Mon, 20 Jul 2026 11:12 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
विज्ञापन
रमाशंकर शुक्ल
विज्ञापन
धौरहरा। धौरहरा के नाम पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र हैं, लेकिन धौरहरा नगर पंचायत अपने ही नाम वाले दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से बाहर है। नगर पंचायत के करीब 19 हजार मतदाता लोकसभा चुनाव में खीरी संसदीय क्षेत्र का सांसद और विधानसभा चुनाव में निघासन क्षेत्र का विधायक चुनते हैं।
विज्ञापन

धौरहरा नगर पंचायत पहले धौरहरा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा थी, लेकिन 2008 के परिसीमन की सिफारिशें लागू होने के बाद उससे भी अलग हो गई। वहीं, परिसीमन के बाद गठित धौरहरा लोकसभा क्षेत्र में नगर पंचायत को शुरू से ही शामिल नहीं किया गया। वर्षों से चली आ रही इस स्थिति के बीच धौरहरा अब अपने ही सियासी पते की तलाश में है।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, 2008 के परिसीमन के बाद नए संसदीय क्षेत्र 2009 के लोकसभा चुनाव और नए विधानसभा क्षेत्र 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से प्रभावी हुए। इससे पहले धौरहरा नगर पंचायत धौरहरा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा थी। परिसीमन के बाद धौरहरा लोकसभा क्षेत्र का गठन हुआ और यह पहली बार 2009 के लोकसभा चुनाव में अस्तित्व में आया, लेकिन धौरहरा नगर पंचायत को इसकी सीमा में शामिल नहीं किया गया।
विज्ञापन

वहीं, नए विधानसभा क्षेत्रों के प्रभावी होने पर नगर पंचायत धौरहरा विधानसभा से अलग होकर निघासन विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा बन गई।नगरवासियों के अनुसार, धौरहरा नगर पंचायत की आबादी 36 हजार से अधिक है, जबकि वर्तमान मतदाता सूची में करीब 19 हजार मतदाता हैं। इसके बावजूद नगर पंचायत लोकसभा चुनाव में खीरी संसदीय क्षेत्र और विधानसभा चुनाव में निघासन क्षेत्र के अंतर्गत आती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसील, प्रमुख सरकारी कार्यालय और अन्य प्रशासनिक संस्थान धौरहरा में होने के बावजूद निर्वाचन क्षेत्रों का वर्तमान स्वरूप जनभावनाओं के अनुरूप नहीं है। धौरहरा के नाम से लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र होने के बावजूद नगर पंचायत के लोगों को अपने ही नाम वाले क्षेत्र के सांसद और विधायक चुनने का अधिकार नहीं है।
सामाजिक संगठनों, व्यापार मंडल और स्थानीय नागरिकों की ओर से कई बार ज्ञापन दिए गए हैं। युवाओं ने ''''धौरहरा बचाओ अभियान'''' भी चलाया था। विधायक विनोद शंकर अवस्थी ने भी इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर समाधान की मांग की है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग की ओर से अभी उत्तर प्रदेश में संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के नए परिसीमन की कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। संवाद
-
कभी चुनावी राजनीति का बड़ा केंद्र था राम वाटिका धाम
धौरहरा नगर पंचायत स्थित ऐतिहासिक श्रीराम वाटिका धाम, जहां मान्यता के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के बालकांड की रचना की और वट वृक्ष रोपा था, कभी क्षेत्र की चुनावी राजनीति का प्रमुख केंद्र माना जाता था। यहां देश के कई दिग्गज नेताओं की चुनावी सभाएं हो चुकी हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, मुलायम सिंह यादव, राज बब्बर, राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह जैसे नेताओं ने यहां जनसभाओं को संबोधित किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक समय धौरहरा की चुनावी हवा पूरे क्षेत्र का राजनीतिक रुख तय करती थी।


यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि धौरहरा की पहचान और जनभावनाओं से जुड़ा विषय है। वर्षों से यह मांग उठती रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
-डॉ. मुकेश गुप्ता, धौरहरा



धौरहरा को उसका सम्मान दिलाने के लिए नगर पंचायत का धौरहरा लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र में शामिल होना जरूरी है। यदि जरूरत पड़ी तो इस मांग को लेकर आंदोलन भी किया जाएगा।
विज्ञापन

-रमाशंकर शुक्ल, धौरहरा

लोकसभा और विधानसभा में धौरहरा नगर पंचायत को व्यावहारिक रूप से शामिल होना चाहिए था, लेकिन भाजपा सरकार नहीं चाहती कि धौरहरा वालों को सम्मान मिले।
-आनंद भदौरिया, सांसद, धौरहरा

धौरहरा नगर पंचायत को धौरहरा विधानसभा क्षेत्र में शामिल होना चाहिए। इसके लिए मैंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है। इस बार परिसीमन में इसकी उम्मीद है।
-विनोद शंकर अवस्थी, विधायक, धौरहरा

रमाशंकर शुक्ल

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें