लखीमपुर खीरी। वृद्धाश्रम में रह रहे बुुजुर्ग भी खुशियां का पर्व पोते पोतियों के बीच मनाना चाहते हैं। मगर, वह मजबूर हैं। क्योंकि न तो उनकी चिंता बेटे को और न ही बहुओं को। त्योहार पर अपनों की याद आते ही वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के चेहरों पर खुशी छा जाती है। मगर, अपनों की यातनाएं याद आते ही खुशियां गायब हो जाती हैं। अपनों की उलाहना से आजिज आकर किसी ने स्वयं घर छोड़ दिया तो किसी को उन लोगों ने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। वृद्धाश्रम में रह रही सलेमपुर कोन निवासी 70 साल की सरस्वती देवी के घर में बेटा और दो पोते हैं। उन्होंने बताया कि घर में मेरे लिए दो वक्त की रोटी नहीं है। इसलिए मजबूरन आना पड़ा। कहा कि यही हमारा घर परिवार है। पोतों की याद आती है, लेकिन करें भी तो क्या। वहीं प्रकाश नगर निवासी 80 साल की लक्ष्मी देवी के एक बेटा और तीन पोते पोतियां हैं। उन्होंने बताया कि घर में छत पर पन्नी डालकर रहते थे। कब तक मारपीट सहते। इसलिए मजूबरी में चले आए। आश्रम परिवार के साथ त्योहार मनाएंगे। संवाद