कादरचौक। रुहेलखंड के विख्यात मेला ककोड़ा में शनिवार को देवोत्थान एकादशी पर श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में गंगा में डुबकी लगाई।शनिवार को सुबह से ही श्रद्धालु दान, पूजा-अर्चना में लीन नजर आए। आसपास के जिलों से भी लोग ट्रैक्टर, ट्रॉलियों और निजी वाहनों से मेला स्थल पहुंचे।
गंगा तट पर सुबह-सुबह ही स्नानार्थियों का सैलाब उमड़ पड़ा। साधु-संतों ने मंत्रोच्चार के साथ देवताओं को जगाया। तंबुओं में तुलसी विवाह की तैयारियां शुरू हो गईं। मेला परिसर में खिचड़ी का भंडारा, कथा-प्रवचन, हवन-यज्ञ और भजन-कीर्तन के आयोजन होते रहे। श्रद्धालुओं ने एकादशी पर सिंगाड़ा, गन्ना, शकरकंद, मूली और पूड़ी-खीर का प्रसाद ग्रहण किया।
देव उठाने के साथ शुरू हुए शुभ कार्य
दीपावली के बाद आने वाली देवोत्थान एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के शयन के बाद जागते हैं। इसी के साथ शुभ कार्यों जैसे- विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञ आदि की शुरुआत होती है। मेला में सैकड़ों श्रद्धालु परिवारों सहित पहुंचे थे। कई पीढ़ियों से कल्पवास कर इस परंपरा को निभा रहे लोग इस बार भी उपस्थित रहे।
रविवार को भी मनाई जाएगी एकादशी, होगा तुलसी विवाह
मेला में श्रद्धालुओं का रेला रविवार को भी जारी रहेगा। आंवला के गुड्डू गुप्ता ने बताया कि उनके कैंप में रविवार को तुलसी विवाह का कार्यक्रम रखा गया है। मेला में श्रद्धालु अगले दो दिन तक धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे।
धार्मिक और सांस्कृतिक आकर्षण
मेला परिसर में इस बार ब्रह्मकुमारी संस्था का शिविर लगाया गया है, जहां नशा मुक्ति अभियान को विशेष थीम के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। शिविर में कुम्भकर्ण की विशाल झांकी और द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन का प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं, भूतमहल नामक झांकी में दो बड़े भूल-भुलैया हाल बनाए गए हैं, जिनमें रहस्यमयी रोशनी और ध्वनि के माध्यम से आगंतुकों को अलग अनुभव कराया जा रहा है। इसके अलावा, हार्टफुलनेस संस्था द्वारा मेला के वीआईपी परिसर में तीन दिवसीय ध्यान शिविर शुरू किया गया है, जिसमें लोगों को मानसिक शांति, एकाग्रता और योगिक साधना के गुर सिखाए जा रहे हैं।
हलवाइयों की दुकानों पर बढ़ी रौनक
मेला में हलवाइयों की दुकानों पर भी भीड़ उमड़ी रही। खजला, पेड़ा, गुजिया और चूरमा बनाने में कारीगर दिन-रात जुटे हैं। व्यापारी पहले से ही मिठाइयों का स्टॉक तैयार कर रहे हैं ताकि भीड़ के बीच कमी न हो।
अब तक नहीं बन पाया पशु चिकित्सालय
मेला में पशु चिकित्सालय अब तक नहीं बन पाया है। शनिवार को डॉ. नेमसिंह गंगवार चिकित्सालय के लिए जगह तलाशते नजर आए। ग्रामीणों ने मांग की है कि पशुओं के इलाज के लिए अस्थायी केंद्र तत्काल बनाया जाए, क्योंकि मेला में सैकड़ों मवेशी भी लाए जाते हैं।
सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में कमी
मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के लिए इस बार भी मंडल स्तर से पुलिस बल मांगा गया था, लेकिन अब तक आधे से भी कम पुलिसकर्मियों की आमद हुई है। कोतवाल राजेंद्र सिंह पुंडीर ने बताया कि रविवार को ब्रीफिंग से पूर्व सभी तैनातियां पूरी कर ली जाएंगी। भीड़ को देखते हुए तीन दिन का रूट डायवर्जन भी लागू किया गया है। कासगंज की ओर से आने वाले भारी वाहनों को गंजडुंडवारा मार्ग से डायवर्ट कर कछला के रास्ते निकाला जाएगा।
70 साल से आ रहीं हूं मेले में : वेदवती
गुराई गांव की 90 वर्षीय वेदवती देवी ने बताया कि वे पिछले 70 वर्षों से अपने नाती-पोतों के साथ यह मेला देखने आती हैं। उन्होंने कहा, पहले दीपक जलाकर चूल्हे पर खाना बनाते थे, अब तो बिजली, पंखे और टेंटों से मेला सजने लगा है। आधुनिकता के साथ मेले का स्वरूप जरूर बदला है, पर गंगा मैया की कृपा वही बनी हुई है।
ककोड़ा मेले में लगे श्रद्वालुओं के तंबू। संवाद
ककोड़ा मेले में लगे श्रद्वालुओं के तंबू। संवाद