पालननाथ मंदिर में स्थापित शिवलिंग
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आज भी मौजूद हैं प्राचीन खंडहर, तालाब
पालगांव में मंदिर बना होने के कारण इसका नाम पालननाथ मंदिर पड़ा है। यहां से पांच किमी दूर बड़खर गांव है जहां राजा विराट की नगरी होने के प्रमाण मिलते हैं। वहां महाभारत काल के खंडहर, तालाब, पोखर आज भी मौजूद हैं। किवदंती है कि विराटनगर के निकट आकर पांडवों ने एक कुंए के निकट स्थित पेड़ पर अपने अस्त्र-शस्त्र टांग दिए इसके बाद पांडवों ने शिव का ध्यान कर नगर में प्रवेश किया।
अज्ञातवास पूर्ण होने पर यहां स्थित एक सरोवर में अपने अस्त्र शस्त्र धोए। मंदिर के पुजारी प्रमोद गिरी कहते हैं पहले हमारे पिता पूजा अर्चना करते थे। उनके निधन के बाद वह जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। वह कहते हैं कि कभी किसी का पशु बीमार होता है तो मंदिर के ताक पर नमक रख देते हैं अगले दिन बीमार पड़े पशु को नमक खिलाने से पशु ठीक हो जाता है।
मोहम्मदी बरवर मार्ग पर चार किलोमीटर दूर स्थित इस प्राचीन मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां मनौती मानने से मस्से ठीक हो जाते हैं। मनौती पूरी होने पर श्रद्धालु अमावस्या को मंदिर में आकर झाड़ू और बैंगन चढ़ाते हैं।