ग्राम पंचायत चुनाव के मुकाबले जिला एवं क्षेत्र पंचायत के चुनाव में अक्सर लोगों का कम ही रुझान रहता है, लेकिन लगुचा पोलिंग स्टेशन पर शनिवार की सुबह से ही वोट डालने के लिए मतदाताओं की लंबी लाइन लग गई। सुबह के समय में यहां ज्यादातर वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंच चुके थे। सबसे ज्यादा उत्साह उन युवतियों में देखने को मिला, जो पहली बार वोट डालने के लिए पोलिंग बूथ तक पहुंची थीं। इन युवतियों को राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन उनका कहना था कि उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए मतदान किया है। लगुचा की रहने वाली रिचा सिंह, आशू सिंह, निशि तथा लक्ष्मी बीए की छात्रा हैं और ओयल में पढ़ती हैं। पहली बार वोट डालकर युवतियां काफी खुश नजर आईं। वोट डालने के बाद युवतियों को उम्मीद है कि इससे परिवर्तन जरूर आएगा। लगुचा में सुबह से ही महिला, पुरुष अपना-अपना वोट डालने के लिए लंबी कतार में लग गए। यहां मतदाताओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
पहली बार लोकतंत्र के पर्व में हुईं शामिल
लखीमपुर खीरी। पंचायत चुनाव का गांव की राजनीति में अहम स्थान है, जिसके जरिए गांवों के विकास की रूपरेखा तय होती है। तीसरे चरण के मतदान में ऐसे मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद रही, जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर पहली बार मतदान में हिस्सा लेकर गांव की राजनीति की दिशा तय करने का प्रयास किया। इन्हें राजनीति की समझ भले ही न हो, लेकिन गांव के सर्वांगीण विकास के प्रति जागरूकता दिखाई दी।
नकहा ब्लाक के सैदीपुर हरैया में दुर्गा देवी ने पहली बार मतदान में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि गांव के विकास के लिए मतदान जरूरी है, लेकिन सही प्रत्याशी का चुनाव उतना ही मुश्किल है। इसी बूथ पर शिवानी ने भी पहली बार मतदान में हिस्सा लेकर लोकतंत्र को मजबूत किया। लखीमपुर ब्लाक के राजापुर मतदान केंद्र पर अपूर्वा औैर पिपरिया स्थित मतदान केंद्र पर सोनी वर्मा ने पहली बार अपने मत का प्रयोग किया।
रजागंज । करनपुर गांव निवासी शेखर सुमन सरस्वती विद्यालय में कक्षा 12 का छात्र है। पहली बार वोट डालकर वह काफी खुश दिखा।
विकलांगता के बावजूद लखीमपुर से आकर वोट डाला
खीरी टाउन। लोकतंत्र के इस पर्व में बूथों पर तर-तरह के रंग देखने को मिले। लखीमपुर में रहने वाले विकलांग सुभाष अपने गांव सढ़ौना वोट डालने के लिए आए। उनका उत्साह देखते ही बन रहा था। विकलांग होने के बावजूद सुभाष ने वोट डालने के लिए किसी का सहारा तक नहीं लिया। वह खुद ही घर से निकल कर बूथ तक पहुंचे और बिना किसी मदद के वोट डाला। सुभाष के साथ ही उनका पूरा परिवार लखीमपुर से गांव में वोट डालने आया था।
वोटर कार्ड था लेकिन सूची में नहीं मिला नाम
लखीमपुर/खीरी टाउन। मतदाता सूची बनाने में बीएलओ ने किस तरह लापरवाही बरती है, यह मतदान के दौरान देखने को मिला। बीएलओ की लापरवाही के कारण तमाम मतदाता वोट डालने से रह गए। शहर से सटे सलेमपुर पोलिंग बूथ पर यहीं की रहने वाली किरण देवी वोटर कार्ड लेकर बूथ पर चक्कर काटती रहीं लेकिन मतदाता सूची में उनका नाम नहीं मिला। वहीं सुआगाड़ा पोलिंग बूथ पर मंजू देवी, सुमन आदि कई महिलाओं के वोट मतदाता सूची से गायब मिले। इसी तरह ग्रामसभा गोपालापुर में देर तक लाइन में लगे रहने के इसी गांव की कांति देवी, गीता देवी, पम्मी तथा लक्ष्मी देवी का नाम मतदाता सूची से गायब होने के कारण वह लोग वोट नहीं डाल सकीं।
95 साल की महिला ने डाला वोट
रजागंज। विकास खंड सदर क्षेत्र की ग्राम पंचायत सौठन निवासिनी बुजुर्ग और बीमार 95वर्षीय निर्मला देवी को पुत्र रामआसरे ने मतदान करवाया।