देवकली तीर्थ में स्थापित हैं खंडित शिवलिंग
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देवकली का देवस्थली के रूप में पारासर पुराण के तीर्थ महात्म्य में उल्लेख मिलता है। महाभारत कालीन कई पुराणों और ग्रंथों में यहां राजा जन्मेजय द्वारा कराए गए नाग यज्ञ का भी उल्लेख है। नेपाल के एक संत भवानी प्रसाद उपाध्याय उर्फ नेपाली बाबा इस स्थान की खोज करते हुए यहां पहुंचे थे।
उन्होंने सर्पकुंड की खुदाई कराई तो पांच फिट की गहराई के बाद राख मिश्रित काली मिट्टी मिली। राजा जन्मेजय की नागयज्ञ स्थली की पुष्टि होने के बाद नेपाली बाबा ने देवकली में चंद्रकला आश्रम की स्थापना की, जो आज भी है। नेपाली बाबा का करीब दो साल पहले निधन हो चुका है। उनके द्वारा स्थापित आश्रम, द्वादश ज्योर्तिलिंग और अन्य देवमूर्तियां आज भी मौजूद हैं।
सूर्य उपासना का प्रमुख केंद्र है देवकली
देवकली सूर्य उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। देवेश्वरनाथ शिव मंदिर के ठीक सामने 70 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा एक मनोरम तीर्थ हैं, जिसमें उत्तर की ओर पक्की सीढ़ियां बनी हुई हैं। महिलाओं के स्नान के लिए स्नानघाट बना है। यह तीर्थ सूर्यकुंड के नाम से प्रसिद्ध है। सूर्यकुंड होने से यह प्रमाणित होता है कि यह स्थान सूर्य उपासना का प्रमुख केंद्र रहा होगा।