अतिवृष्टि/ओलावृष्टि से जनपद में फसलों को क्षति हुई थी, जिसमें कई किसानोें की कमर टूट चुकी है। पहले दो बार कराए गए सर्वे में मानक के आड़े आने से जरूरतमंद पीड़ित किसानों को राहत नहीं मिल पा रही थी, क्योंकि मानक के अनुसार मुआवजे के लिए कम से कम 50 फीसदी या इससे अधिक क्षति होना अनिवार्य है। लोगों के प्रदर्शन और मांग को देखते हुए अब शासन ने 25 से 50 फीसदी तक क्षति वाले किसानों को राहत देने का फैसला लिया है। राहत आयुक्त लीना जौहरी ने क्षति का गाटावार/किसानवार ब्यौरा तत्काल तलब किया है।
जिला प्रशासन ने सभी तहसीलों में दो बार किसानों को हुई क्षति का सर्वे कराया था। कृषि विभाग ने क्रॉस चेकिंग की थी। जनपद में 17,104 हेक्टेअर फसल को नुकसान की रिपोर्ट सभी तहसीलों ने दी थी, जिसमें औसतन गेहूं को 14.29, सरसों और मसूर को 15-15, चना को 13.43, मटर को 13.37, आलू को 9.29 सहित अन्य फसलों को 6.43 फीसदी नुकसान की रिपोर्ट है। सिर्फ निघासन ब्लाक के गांव बेलापरसुआ में 50 फीसदी से अधिक क्षति पाई गई। लिहाजा यहां के 57 किसानों को 94,489 रुपये का मुआवजा वितरण के लिए शासन ने बजट भी जारी कर दिया है। हालांकि कई तहसीलों ने 40 फीसदी तक या 50 फीसदी से कम क्षति का हवाला देते हुए रिपोर्ट दी थी।
तो इसलिए कायम है उम्मीद
रबी सीजन 2014-15 में विभिन्न फसलों का कुल आच्छादन 2,76,007 हेक्टेअर है, जिसमें 1,23,961 हेक्टेअर क्षेत्रफल में फसलों का सर्वे कराया गया है। जबकि 1,96,784 हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं की बोवाई की गई है। इसी तरह र्राई सरसों 31547 हेक्टेअर, मसूर 14963 हेक्टेअर आदि की बोवाई की गई है। सभी तहसीलों द्वारा किए गए सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें, तो सिर्र्फ 1,23,961 हेक्टेअर में क्षति का आंकलन किया गया। इसमें 17,104 हेक्टेअर फसलें क्षतिग्रस्त पाई गई हैं। लिहाजा करीब 1.52 लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में सर्वे नहीं कराया गया है।
डीएम किंजल सिंह ने बताया कि फसलों को 25 से 50 फीसदी तक हुई क्षति के मामले में सभी तहसीलदारों से रिपोर्ट मांगी गई है। अभी मुआवजे की बात स्पष्ट नहीं है, लेकिन ऐसे किसानों का ब्यौरा कलेक्ट कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।