धौरहरा। शारदा नदी के बंधे के भीतर फैली 17 बीघा जमीन... लेकिन उस जमीन पर न हरियाली उगती है और न घर में खुशहाली आती है। जलभराव में डूबी इस जमीन पर फसलें नहीं होतीं। यही हकीकत लौखनिया गांव के उस परिवार की है, जिसने टिन शेड गिरने की एक दर्दनाक घटना में अपने बुजुर्ग माता-पिता को खो दिया।
छोटन्न यादव और उनकी पत्नी की टिन शेड के नीचे दबकर मौत हो गई। उनके साथ सो रही पोतियां पिंकी और बबली अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। गांव में मातम पसरा है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
परिवार के नाम टहारा और मैनहा में करीब 17 बीघा जमीन जरूर है, लेकिन वह शारदा के बंधे के भीतर जलमग्न क्षेत्र में है। साल के अधिकतर समय पानी भरा रहता है, जिससे खेती संभव नहीं हो पाती। मजबूरी में बेटों को दूसरों के खेत बटाई पर लेकर खेती करनी पड़ती है। छोटा बेटा पैरु खैरटिया गांव में एक सिख किसान का ट्रैक्टर चलाकर परिवार का पेट पालता है।
बड़ा बेटा कौशल यादव अपनी मेहनत से एक कमरा बनवा सका, लेकिन बाकी परिवार अब भी टिन शेड के सहारे जीवन काट रहा है। विडंबना यह है कि जमीन होने के कारण परिवार कई सरकारी योजनाओं से वंचित रह गया। वृद्धावस्था पेंशन और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं मिल सका। सर्वे के दौरान टिन शेड और जमीन को आधार बनाकर उन्हें अपात्र कर दिया जाता रहा। किसान सम्मान निधि के अलावा कोई ठोस सहारा इस परिवार को नहीं मिला।
बुधवार शाम जब बुजुर्ग दंपती का शव गांव पहुंचा तो माहौल गमगीन हो उठा। बेटे दिनेश यादव ने भारी मन से बताया कि बृहस्पतिवार को दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
एसडीएम शशिकांत मणि ने कहा है कि परिवार को कृषक दुर्घटना बीमा योजना का लाभ दिलाया जाएगा और आवास व राशन कार्ड की व्यवस्था भी की जाएगी।