31 मार्च 2017 तक के फसली ऋण को माफ करने की मांग
मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा
प्रदेश सरकार ने संकल्प पत्र के मुताबिक पहली कैबिनेट की बैठक कर कर्ज माफी का वादा पूरा किया है, जिससे लाखों किसानों के चेहरे पर खुशी दौड़ गई है। वहीं कुछ किसान मायूस हुए हैं, जो फसली ऋण की समय सीमा 31 मार्च 2016 तक रखे जाने से वंचित रह गए हैं। ऐसे किसानों का एक प्रतिनिधि मंडल बुधवार को डीएम से मिला और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा है, जिसमें 31 मार्च 2017 तक लिए गए फसली ऋण को माफ करने की मांग की है।
नकहा ब्लॉक के गांव अशोगापुर निवासी राजू गिरि, अशोक कुमार, बांकेलाल, बालक राम मौर्या सहित आसपास गांवों के दर्जनों किसानों ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने संकल्प पत्र के माध्यम से सभी लघु एवं सीमांत किसानों का फसली ऋण माफ करने का वादा किया था। तब समय सीमा का जिक्र नहीं किया गया था। कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय का हवाला देते हुए किसानों ने कहा है कि 31 मार्च 2016 तक किसानों द्वारा लिया गया फसली ऋण माफ किया गया है। इससे तराई क्षेत्र में बाढ़-कटान और जलभराव जैसी समस्याओं से फसलों का नुकसान उठाने वाले काफी किसान लाभ पाने से वंचित रह गए हैं। किसानों ने कैबिनेट के निर्य में संशोधन चाहते हुए 31 मार्च 2017 तक बैंकों से लिए गए फसली ऋण को माफ करने की मांग की है। प्रतिनिधि मंडल में मदनगोपाल, अनूप गिरि, रामासरे, अन्नूलाल मौर्या, कृष्ण कुमार, संदीप गिरि, गजोधर प्रसाद शामिल रहे।
लघु एवं सीमांत किसानों पर 2526 करोड़ फसली ऋण
लखीमपुर खीरी। कैबिनेट की पहली बैठक से पहले सरकार ने जिले की बैंकों से आंकड़े मांगे थे, जिसमें बैंकों ने दिसंबर 2016 तक लिए गए फसली ऋण की रिपोर्ट भेजी थी। एलडीएम अशोककुमार द्विवेदी ने बताया कि कुल 3,42,009 लघु एवं सीमांत किसानों पर 2526 करोड़ रुपये ऋण है। इसमें 2,21,472 सीमांत और 1,20,537 लघु किसान हैं। सरकार ने 31 मार्च 2016 तक बैंकों से लिए गए फसली ऋण में एक लाख रुपये तक माफ करने की बात कही है, जिससे अभी आंकडें बदलेंगे। एलडीएम ने बताया कि ढाई एकड़ यानी एक हेक्टेअर वाले किसान सीमांत और दो हेक्टेअर तक जमीन वाले किसान लघु की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार से गाइड लाइन प्राप्त होने के बाद ही कर्ज माफी की कार्रवाई संपन्न कराई जाएगी।