पीएफएमएस सिस्टम लागू होने के बाद सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना जेएसवाई और आशाओं को मिलने वाले भुगतान में अचानक कमी आ गई है। अप्रैल से अभी तक इसका भुगतान पचास प्रतिशत से भी कम हुआ है। शासन ने इसे गंभीरता से लिया है और सीएमओ सहित जिले में चार लोगों को वेतन रोक दिया गया। इसके बाद विभाग चौकन्ना हुआ है। सीएमओ ने सभी पीएचसी और सीएचसी से भुगतान कम होने का कारण पूछा है और संबंधित रिकार्ड तलब किया है।
मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के उद्देश्य से शासन ने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव पर जोर दिया। इसके तहत 1400 रुपये प्रसूता को देने का प्रावधान है। इसके लिए आशाओं को भी प्रोत्साहन राशि दी जाती है लेकिन जिले में जेएसवाई और आशाओं का पचास प्रतिशत भुगतान भी नहीं हो पाया है। इसके लिए एनआरएचएम के मिशन निरीक्षक ने सीएमओ को जिला प्रोग्राम मैनेजर, एकाउंट मैनेजर और डीसीसीएम के वेतन रोकने के निर्देश दिए है। सीएमओ ने इस सभी का वेतन रोक दिया। बीते दिनों प्रदेश की समीक्षा के दौरान, प्रमुख सचिव ने सीएमओ का वेतन भी स्थिति में सुधार न होने तक रोक दिया है। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग चौकन्ना हुआ है। सीएमओ ने सभी सीएचसी और पीएचसी में भुगतान की स्थिति जानने के लिए रिकार्ड तलब किए हैं।
यह है मुख्य समस्या
एनआरएचएम प्रभारी डॉ. बीबी राम ने बताया पीएफएमएस सिस्टम (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) शुरू हुआ है तब से भुगतान की दिक्कत पूरे प्रदेश में हो गई है। उन्होंने बताया अभी तक जेएसवाई के तहत लाभार्थी को बेयरर चेक दे दिया जाता था लेकिन पीएफएमएस सिस्टम के तहत महिला को जो चेक दिया जाएगा उस महिला का खाता नंबर होना चाहिए। दिक्कत यह है कि अधिकांश महिलाओं का खाता नहीं खुला होता है और बिना खाता के भुगतान नहीं हो सकता ऐसी स्थिति में चाहकर भी कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया कि संबंधित महिला को आशा लाती है इसके लिए उसे प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। लाभार्थी का भुगतान नहीं हो पाया तो आशाओं का भी रूक गया। आशाओं को चाहिए कि थोड़ी तत्परता महिला का खाता खुलवाने में भी दिखाएं।
सीएमओ डॉ. वीके साहू ने बताया कि सभी पीएचसी और सीएचसी के रिकार्ड तलब किए गए हैं। उनका वेतन रुका है इस संबंध में अभी तक उन्हें कोई पत्र नहीं मिला है लेकिन फिर भी उन्होंने वेतन नहीं लिया है। रिकार्ड देखने के बाद कार्यक्रम को और तेज किया जाएगा। यह प्रयास किया जा रहा है कि इस माह भुगतान 80 प्रतिशत तक हो जाए।