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‘नकारा’ में खोलना था स्कूल, खोल दिया बांकेगंज में 

Fri, 09 Dec 2016 10:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)।
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गलती - फोटो : अमर उजाला
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मामला उजागर हुआ तो बंद किया स्कूल, बच्चे निजी विद्यालय में ट्रांसफर
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31 बच्चों को भविष्य अधर में
सरकारी शिक्षा को किस तरह पलीता लगाया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि केंद्र सरकार की योजना के तहत ब्लाक मितौली के गांव नकारा में राजकीय हाईस्कूल खोला जाना था, जिसे ब्लाक बांकेगंज में खोल दिया गया। पांच महीने स्कूल चला। अब मामला जब खुलने को हुआ तो डीआईओएस ने स्कूल बंद कर बच्चों के एक निजी स्कूल में शिफ्ट कर दिया। 31 बच्चों के अभिभावक अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या निजी विद्यालय बिना पैसा उनके बच्चों को पढ़ाएगा। खास यह कि इसकी खबर डीएम को भी नहीं है।
केंद्र सरकार के राजकीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत पांच किलोमीटर के क्षेत्र में यदि हाईस्कूल नहीं है तो एक राजकीय हाईस्कूल खोला जाना था। इसी के तहत गांवों में राजकीय हाईस्कूल संचालित करने के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे। डीआईओएस दफ्तर से ब्लाक मितौली के गांव नकारा में राजकीय हाईस्कूल का प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन जब वहां से नकारा के लिए प्रस्ताव स्वीकृत होकर आया तो विभाग ने कुकरा टाउन/ बांकेगंज नाम से ब्लाक मुख्यालय बांकेगंज में विद्यालय खोल दिया। जबकि इसी ब्लाक के गांव कुकरा में पहले से राजकीय हाईस्कूल संचालित है। कक्षा नौ में बच्चों का दाखिला हुआ और जुलाई से विद्यालय शुरू हो गया। इधर जब कुछ पत्रावलियां ज्वाइंट डायरेक्टर के यहां पहुंची तो वहां से यह मामला पकड़ में आया। अब विभाग यह कह रहा है कि जब विद्यालय स्वीकृत होकर आया तो नकारा को कुकरा समझ लिया गया।
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नकारा को कुकरा समझ लिया
 जब विद्यालय स्वीकृत होकर आया तो नकारा को कुकरा समझ लिया गया। जब स्थिति स्पष्ट हुई तो स्कूल बंद कर दिया गया है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए बांकेगंज के ही जेडी इंटर कॉलेज में बच्चों की शिक्षा व्यवस्था कर दी गई है। बच्चों का रजिस्ट्रेशन पूर्व में ही राजकीय हाईस्कूल कुकरा में हो चुका है, इसलिए उनकी परीक्षा कुकरा स्थित विद्यालय से दिला दी जाएगी। स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ वीरेश चंद्र बाजपेयी का तबादला कुकरा के राजकीय हाईस्कूल में कर दिया गया है। 
- डॉ. ओमप्रकाश गुप्ता, डीआईओएस
 
स्कूल बंद होने से अभिभावक असमंजस में
बांकेगंज। अभिभावकों संजय कुमार चौधरी, अशोक कुमार, छविलाल, जसकरन, पप्पू, मिट्ठू आदि ने शिक्षा विभाग के इस तुगलकी फरमान पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि निजी स्कूल संचालक बिना फीस उनके बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे। अभिभावकों को मानना है कि छात्रों का भविष्य अधर में है। उन्होंने शासन- प्रशासन से समस्या के समाधान की मांग की है।
 
डीआईओएस का विरोधाभासी बयान 
अपनी एक गलती को छिपाने के लिए डीआईओएस डॉ ओमप्रकाश गुप्ता विरोधाभासी बयान दे रहे हैं। उन्होंने पहले सुबह यह बताया कि गांव नकारा के बजाय कुकरा में स्कूल स्वीकृत होकर आ गया था। फिर दोपहर में कई सवाल करने पर बोले, स्वीकृति पत्र को पढ़ने में त्रुटि हुई, जिससे गांव नकारा को उनका स्टाफ कुकरा समझ बैठा। इस पर जब डीआईओएस से पूछा गया कि क्या डीएम को इस बाबत जानकारी है तो उन्होंने कहा, सभी को सूचना दे दी गई है।
 
डीएम को भी नहीं बताया
डीआईओएस ने गलती छिपाने के लिए सीधे स्कूल बंद कर दिया। उन्होंने डीएम आकाशदीप से भी इस गंभीर मामले पर चर्चा करने की जरूरत नहीं महसूस की। इस बाबत जब डीएम से ‘अमर उजाला’ ने जानकारी चाही तो वह चौंक गए। बोले, उन्हें ऐसी कोई जानकारी नहीं है। अब पता चला है तो पूरे मामले की जांच कराएंगे।
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निजी स्कूल संचालक भी दिखे मजबूर
जेडी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य पंकज कुमार भी मजबूर नजर आए। उनका कहना है कि डीआईओएस का आदेश मानना उनकी मजबूरी है। राजकीय हाईस्कूल के प्रिंसिपल वीरेश वाजपेयी ने डीआईओएस के आदेश का हवाला देते हुए 31 बच्चों की पढ़ाई सुचारु करने को कहा। इस पर उन्होंने बच्चों की पढ़ाई शुरू कर दी है।
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