जिला सहकारी बैंक में नेट बैंकिंग की जानकारी देते अध्यक्ष विनीत मनार व सचिव
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लखीमपुर खीरी। जिला सहकारी बैंक में कर्मचारियों की भारी कमी (495 पदों के सापेक्ष 325 कार्यरत) होने के बावजूद प्रबंध समिति ने अच्छा लाभांश अर्जित करने में सफलता पाई है। वहीं नई योजनाएं लागू करके बैंक के कामकाज को ग्राहकों के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। बैंक के अध्यक्ष विनीत मनार ने बताया कि दो नई योजनाएं लांच की गई है, जिसमें गन्ना पर्ची पर किसानों को ऋण वितरण और शहरी क्षेत्रों में डेली डिपॉजिट योजना प्रमुख है।
डीसीबी के सभागार में प्रबंध समिति ने वर्ष 2018-19 और 2019-20 में बैंक के व्यवसाय एवं वित्तीय स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि 2018-19 में 123.55 लाख रुपये शुद्ध लाभ कमाया था। जबकि 2019-20 में बैंक का शुद्ध लाभ बढ़कर 239.97 लाख रहा। वहीं एनपीए 7.75 प्रतिशत से घटकर 4.15 प्रतिशत रह गया हैै। राज्य सरकार द्वारा गन्ना मूल्य भुगतान के लिए दिए गए ऋण को डीसीबी के माध्यम से वितरित कराने से बैंक को बतौर एजेंट एक प्रतिशत ब्याज की धनराशि प्राप्त हो रही है, जिससे बैंक को 1.45 करोड़ की आय हुई है। नई योजनाओं के बारे में अध्यक्ष विनीत मनार ने बताया कि गन्ना पर्ची पर ऋण देने की योजना में 55 लाभार्थियों को 24.47 लाख ऋण वितरित किया गया है। डेली डिपॉजिट योजना के तहत पांच एजेंट के माध्यम से 452 खाते खोले गए हैं, जिसमें 54.26 लाख का निक्षेप जमा हुआ है। अध्यक्ष ने बताया कि बैंक खाताधारकों को अपने खातों में किए गए लेनदेन की जानकारी के लिए मोबाइल पर एमपासबुक एप की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 132 प्रारंभिक कृषि ऋण समितियों में से 131 समितियों को कंप्यूटरीकृत कर दिया गया है। बैंक की सभी 62 शाखाओं को माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराए गए हैं और रेनबो चैनल के नाम से त्वरित सुविधा के लिए टेलर काउंटर बनाए गए हैं। वहीं 17 शाखाओं में डेली डिपॉजिट का काम शुरू किया गया है। सहकारी समितियों को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करते हुए माइक्रो एटीएम दिए गए हैं। इसके अलावा खाताधारकों को एंड्रायड फोन के माध्यम से बैंक टू बैंक त्वरित भुगतान की सुविधा के लिए बैंक को आईएमपीएस पर सक्रिय किया गया है।
कई नई योजनाएं प्रस्तावित
अध्यक्ष विनीत मनार ने बताया कि ग्राहकों को फास्ट टैग की सुविधा देने के लिए काम किया जा रहा है। इसकी अनुमति के लिए शीर्ष बैंक के प्रबंध निदेशक से अनुरोध किया हैै। विविधीकरण योजना के तहत व्यक्तिगत ऋण की अधिकतम सीमा पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाना प्रस्तावित है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समितियों के माध्यम से बिजली बिल जमा करने का कार्य शीघ्र ही प्रारंभ किया जाएगा।
12 समितियों को मल्टी सेंटर बनाने की कवायद
एआर कोऑपरेटिव रत्नाकर सिंह ने बताया कि किसानों के हित में 16 सहकारी समितियों में फॉर्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं, जिनमें पांच-पांच लाख की मल्चर, सुपर सीडर, प्लाऊ आदि मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। पराली प्रबंधन के लिए किसानों को न्यूनतम किराए पर मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं 12 समितियों को मल्टी सेंटर के तौर पर विकसित करने की योजना है, जिसमें किसानों से जुड़े विभिन्न प्रकार के उत्पाद, कॉमन सर्विस सेंटर आदि सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।