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खतरे के निशान से नीचे आई शारदा

Tue, 30 Jun 2015 07:30 PM IST
पलियाकलां
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इलाके में भले ही वर्षा हो रही हो लेकिन पहाड़ों पर वर्षा न होने से शारदा नदी का जलस्तर घट कर खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया है। जिससे इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है लेकिन जो बाढ़ पिछले दिनों आई थी उसका पानी अब भी खेतों और नदी के समीपवर्ती गांवों के निचले भागों में भरा हुआ है। इसके चलते कई ग्रामीणों को शारदा नदी पुल पर शरण लेनी पड़ी है।
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सोमवार को इलाकाई वर्षा से शारदा नदी खतरे के निशान 153.620 से करीब 50 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई थी लेकिन पहाड़ों पर वर्षा न होने से बनबसा बैराज काफी कम रिलीजिंग कर रहा था जिससे हालात ठीक होने की संभावनाएं पनप गईं थीं। हालांकि मंगलवार को भी इलाके में वर्षा हुई लेकिन बनबसा से रिलीजिंग काफी कम होने के कारण जलस्तर तेजी से घटता गया और नदी खतरे के निशान से काफी नीचे पहुंच गई। इससे काफी राहत महसूस की गई है लेकिन नदी के समीपवर्ती गांवों के निचले भागों को इस जलस्तर के कम होने से कोई खास फायदा नहीं पहुंचा है। वहां अब भी पानी भरा हुआ है जिसके चलते यहां कई ग्रामीण परिवार समेत शारदा नदी पुल पर शरण लिए हुए हैं। खेतों में पानी भरा होने के कारण पशुओं के चारे की किल्लत पैदा हो गई है।
मझगईं। सोमवार और मंगलवार को हुई बारिश के चलते और सुहेली नदी के उफनाने से चौखड़ा फार्म में बाढ़ का पानी भरने लगा है। जिससे यहां के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं हैं। जसवंत सिंह, सुरेंद्र सिंह, दयाल सिंह, बलजीत सिंह, पूर्व प्रधान सत्यपाल सिंह, धर्मपाल सिंह, धमेंद्र सिंह आदि किसानों ने बताया कि अभी जहां तहां से इंतजाम कर धान लगाए गए हैं और गन्ना भी काफी छोटा है अगर इसी तरह से पानी बढ़ता रहा तो सारी फसलें चौपट हो जाएंगी। प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी बाढ़ से बचाव का कोई उपाय नहीं कर रहे हैं, कई वर्षों से बाढ़ का कहर किसानों पर टूट रहा है। जिससे इलाके का किसान पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है।
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वर्षा से जनजीवन अस्त-व्यस्त
पलियाकलां। मंगलवार को भी जारी रही बारिश से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। कभी बूंदाबांदी तो कभी भारी बारिश से शहर में सड़कों पर जलभराव रहा और लोगों को इसमें खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा। वहीं कई मोहल्लों के निचले भागों में लोगों के घरों में वर्षा का पानी भर गया। सड़कों पर कीचड़ भी खूब रहा। बारिश जारी रहने से बाजार में लोगों की आमद काफी कम रही और सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदार ग्राहकों के न आने से काफी परेशान दिखे और राजमिस्त्री और मजदूरों को काम नहीं मिल सका।
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