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जमीन में समा सकती है जिले के पास की दलित बस्ती 

Wed, 06 Jul 2016 11:41 PM IST
विकास शुक्ल लखीमपुर खीरी।
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भूस्खलन - फोटो : अमर उजाला
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भूस्खलन का कारण बना पांच साल पहले खोदा गया नाला
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ध्यान नहीं दे रहे अधिकारी और जनप्रतिनिधि, हरे-भरे पेड़ों पर भी आफत
 शहर से महज चार किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत मीरपुर की दलित बस्ती कभी भी जमीन में समा सकती है। वजह है मामूली वर्षा में ही यहां जमीन धंस रही है। नतीजतन दलित बस्ती के पास 20 से 25 फुट तक के गहरे गड्ढे हो गए हैं। तमाम पेड़ जमीन धंसने के साथ गिर चुके हैं, जबकि कुछ कभी भी गिर सकते हैं। इस तरह यहां की हरियाली को भी क्षति पहुंच रही है। इससे भयभीत होकर दलित बस्ती के 26 परिवार रात जागकर काट रहे हैं। ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को नहीं है, लेकिन आज तक इसे किसी ने भी गंभीरता से नहीं लिया है।
ग्राम पंचायत मीरपुर की प्रधान चंद्रा देवी ने बताया कि गांव की आबादी करीब छह हजार है। पांच साल पहले तत्कालीन प्रधान ने पानी निकास के लिए कच्चा नाला खुदवाया था। यह नाला महज तीन फुट गहरा और दो फुट चौड़ा था, जिसमें गांव के बीच से लोगों के घरों का पानी जाता था। नाले का पानी गांव से बाहर बंजर भूमि में गिरता था। बलुई मिट्टी होने के कारण पहली वर्षा हुई तो खोदे गए नाले की मिट्टी बहने के साथ यहां की जमीन भी धंसने लगी और महज तीन फुट के नाले ने खाईं का रूप ले लिया। साल दर साल यह खाईं गहरी और चौड़ी होती गई और अब यहां 20 से 25 फुट तक की गहरी खाई बन चुकी है, जिसकी चौड़ाई भी 10 से 15 फुट है। लगातार जमीन धंसने के कारण अब यह खाई पास की दलित बस्ती को ही खाने लगी है। इस खाई में तमाम हरे भरे पेड़ जमीन धंसने के साथ समा चुके हैं, जबकि कुछ कभी भी जमीन के साथ इसमें समा जाएंगे। गांव वालों ने तहसील दिवस में इस समस्या को बताया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। फिर डीएम को भी मामले से अवगत कराया गया, लेकिन कोई अधिकारी इसे देखने तक नहीं पहुंचा।
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कभी भी ढह जाएगा रामगोपाल का छप्परपोश घर
गहरी बनती जा रही खाई के पास मुश्किल से तीन मीटर पर रामगोपाल का छप्परपोश घर है। वह कभी भी ढह सकता है। उनका पूरा परिवार भयभीत है। रामगोपाल का कहना है कि वह भूमिहीन हैं और आवास के लिए कोई और जगह भी नहीं है। यह जमीन ढह गई तो वह परिवार लेकर कहां जाएंगे।

गांव के एक तरफ अवैध खनन से बने हैं जानलेवा गड्ढे  
लखीमपुर खीरी। वैसे तो जिले में ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां अवैध खनन नहीं होता हो, लेकिन शहर से महज चार किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत मीरपुर में अवैध खनन का मामला तब सामने आया, जब गांव की दलित बस्ती से महज तीन से पांच मीटर दूर तक कटान पहुंच गया। हालांकि पिछले दो महीनों से यहां खनन नहीं हो रहा है, लेकिन इससे पहले बड़े पैमाने पर खनन होने के कारण गांव के एक तरफ अवैध खनन से जानलेवा गड्ढे बन गए हैं, जो 20 से 25 फुट तक गहरे हैं। जिले में जहां अवैध खनन का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है, वहीं पिछले दो सालों में जिले भर में बालू या फिर मिट्टी खनन का ठेका भी नहीं किया गया। गांव वाले कहते हैं कि वर्षा के बाद फिर अवैध खनन शुरू हो जाएगा। फिलहाल गांव के एक तरफ समूचे खेतों में अवैध खनन करके उन्हें 20 से 25 फुट खोदकर गहरे गड्ढे में बदल दिया गया है। वर्षा में इनमें पानी भी भर रहा है और यह गड्ढे जानलेवा होते जा रहे हैं। 

पिछले साल खनन के गड्ढे ही बन गए थे चार बच्चों की कब्रगाह
पिछले साल एक जुलाई 2015 को खीरी टाउन के मोहल्ला हनियाटोला निवासी कन्हईलाल की नौ वर्षीय बेटी रेशमी देवी, 12 वर्षीय बेटा राकेश कुमार तथा डालचंद के 13 वर्षीय पुत्र संजय और 10 वर्षीय घनश्याम की मोहल्ले के पास ही ऐसे ही भट्ठे की ईंट पथाई के लिए किए गए अवैध खनन के गड्ढों में भरे वर्षा के पानी में डूबकर मौत हो गई थी। तब अमर उजाला की खबरों पर ही प्रशासन ने संजीदगी दिखाते हुए गड्ढों के पास संकेतक बोर्ड लगवाकर लोगों को वहां जाने से रोकने की अपील की थी।

क्या कहते हैं बस्ती के लोग
‘कभी भी खत्म हो जाएगी बस्ती’
गांव निवासी राममूर्ति कहते हैं कि दलित बस्ती के एक ओर तेजी से भूमि धंस रही है। अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं। कई बाद लेखपाल से भी कहा पर कोई असर नहीं हुआ। कभी भी बस्ती खत्म हो जाएगी।

‘पक्का नाला बनें तभी रुक सकता है भूस्खलन’
गांव निवासी रामस्वरूप कहते हैं कि इसका समाधान एक ही है कि पक्का नाला बनवाकर कटान का बंदोबस्त किया जाए अन्यथा दलित बस्ती के साथ पूरा गांव जमीन में समा जाएगा।

‘मेरा तो घर कभी भी ढह जाएगा’
रामगोपाल की पत्नी रानी बेहद परेशान है। उन्होंने कहा कि उनका तो घर कभी भी ढह जाएगा। अधिकारी समय से ध्यान दे लेंगे तो शायद उनका नुकसान बच जाए।

‘वर्षा होती है तो नहीं आती नींद’
दलित बस्ती निवासी पम्मी कहती हैं कि जब वर्षा होती है तो नींद नहीं आती। लगातार जमीन कट रही है। कभी भी उनके घर उसमें समा सकते हैं।

इन 26 परिवारों पर है खतरा
गांव निवासी राममूर्ति, विजय कुमार, कमलेश कुमार, लीलाकरन, बंधालाल, रामगोपाल, जराखन, रामासरे, जलकरन, रवींद्र, बहादुर, बाबूराम, रामबहादुर, रामकुमार, राजेंद्र, रामकिशुन, रामस्वरूप, अच्छेलाल, बालक, श्यामू, शाबिर, रामायण प्रसाद और सुरेश आदि 26 लोगों के परिवारों की दलित बस्ती है, जिसकी ओर कटान करता हुआ नाला बढ़ रहा है। इन परिवारों के करीब 175 लोग कटान से भयभीत हैं।

पक्का नाला बनवाने का भेजा प्रस्ताव
प्रधान चंद्रा देवी कहती हैं कि उन्होंने चुनाव जीतने के बाद पक्का नाला बनवाने के लिए प्रस्ताव डाला है, लेकिन इसकी लागत अधिक आएगी, इसलिए ग्राम निधि से इसका बन पाना असंभव है।

मीरपुर में नहीं हुआ कभी कोई खनन पट्टा
गांव मीरपुर में खनन के लिए कभी कोई पट्टा भी नहीं हुआ। इसकी पुष्टि खनन प्रभारी/एडीएम एसपी सिंह ने की है। इसके बाद भी गांव में धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है। नतीजतन गांव की दलित बस्ती कटान के मुहाने पर है। गांव वाले कहते हैं कि कटान इस कदर होता रहा तो एक दिन इस गांव का वजूद ही मिट जाएगा।
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गांव मीरपुर में वर्षा में जमीन धंसने की समस्या पता चली है। मामले की जांच कर इसके समाधान के लिए रिपोर्ट मांगी गई है। जमीन को कटने से बचाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। जरूरी होगा तो पक्का नाला बनवाया जाएगा।
-आकाशदीप, डीएम
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