लखीमपुर खीरी। हिंदू धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊपर माना गया है। देवकली तीर्थ के आचार्य पं. प्रमोद दीक्षित बताते हैं कि आषाड़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है, जो रविवार को है। सभी मानव के जीवन में गुरु पूर्णिमा का विशेेष महत्व है, क्योंकि ऐसा कोई मानव नहीं है जिसे गुरु की आवश्यकता न पड़ी हो। भले की उसका रूप कोई भी रहा हो।
मनुष्य की पहली गुरु उसकी मां और फिर स्कूल में टीचर से लेकर हर वह शख्स उसका गुरु रहा है, जिससे उसने कुछ न कुछ सीखा है। इस दिन लोग अपने गुरु स्थान, दिवंगत गुरु एवं ब्रह्मलीन गुरु की समाधि पर जाकर उनका विधिवत पूजन करते हैं। जिन लोगों के आध्यात्मिक गुरु नहीं है वे अपने शिक्षकों का वंदन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसलिए हर उस व्यक्ति का सम्मान करें, जिससे कुछ न कुछ सीखा हो।
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महर्षि वेदव्यास को समर्पित है गुरु पूर्णिमा
वेद, पुराण एवं महाभारत आदि की रचना करने वाले महर्षि वेद व्यास की जयंती के रूप में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन गुरुओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।