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स्वाद, संस्कृति और संगीत का संगम है लोहड़ी

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लखीमपुर खीरी। स्वाद, संस्कृति और संगीत का संगम है लोहड़ी। पंजाबी संस्कृति की खूबसूरती को समेटे लोहड़ी से गांव और शहर सराबोर रहते हैं। लहलहाती फसल, ढोल की गूंज और अलाव की गर्मी के बीच लोहड़ी रिश्तों की मधुरता और परिवार की सुख-समद्धि की कामना के लिए मनाई जाती है। सोमवार को लोहड़ी मनाई जाएगी। इसके लिए यहां पूरी तैयारी कर ली गई है।
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लोहड़ी का संबध भले ही किसानों से हो, लेकिन आधुनिक युग में भी इसकी सोंधी खुशबू से गांव से लेकर महानगर महकते हैं। सिखों के पावन पर्व पर किसानों की आस्था और उमंग इस दौरान जिंदगी के बीच तनाव से निकलकर अपनों के बीच खुशी का पल बिताने का मौका देती है। उमंग और उल्लास से सराबोर लोहड़ी की रात में सिख और पंजाबी समुदाय के हर घर में परंपरागत गीत गाए जाते हैं। नवविवाहित जोड़ों के लिए यह पर्व कुछ ज्यादा ही उल्लास भरा होता है। गांव के बच्चों द्वारा घर-घर जाकर लकड़ियां एकत्र कर घर में जलाने और पूजने का क्रम चलता है। अग्नि की परिक्रमा करते हुए मक्के के दाने और अन्य भोज्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। भोजन में मक्के की रोटी और सरसों के साग के अलावा खिचड़ी बड़े चाव से खाई जाती है। संगीत में भांगड़ा और गिद्दा का धमाल खूब होता है।
पंजाबी कॉलोनी में लोहड़ी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। पूरा समाज एक साथ एकत्र होकर अग्नि के फेरे लेगा। साथ ही अनाज के दाने अर्पित किए जाएंगे। साल भर लोहड़ी का इंतजार रहता है।
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-रसमीत कौर, पंजाबी कॉलोनी
लोहड़ी को लेकर सभी लोगों में ढेर सारा उत्साह है। सिख समुदाय के गौरवशाली अतीत से जुड़ा है लोहड़ी। यह दिन नवविवाहित जोड़ों के लिए खास होता है। उनके सुखमय जीवन की कामना की जाती है।
-सुखप्रीत कौर, पंजाबी कॉलोनी
बांकेगंज के पहाड़नगर गांव निवासी अजीत सिंह का कहना है कि जोश और उमंग का पर्व है लोहड़ी। सिख समुदाय इस त्योहार की खुशियां मनाने को पूरे साल बेसब्री से इंतजार करता है।
पहाड़नगर निवासी लाड़ी सिंह का कहना है कि लोहड़ी का त्योहार संगीत का संगम होता है। इस दिन पंजाबी समुदाय के हर घर में परंपरागत गीत गाए जाते हैं।
पहाड़नगर गुरुद्वारा के बाबा दिलबाग सिंह ने बताया कि स्वाद और संस्कृति का संगम है लोहड़ी। अलाव की परिक्रमा करते हुए अग्नि को मक्के दाने और अन्य भोज्य पदार्थ अर्पित कर लोहड़ी मनाई जाती है।
पहाड़नगर निवासी धमेंद्र सिंह का कहना है कि लोहड़ी नवविवाहित जोड़ों के जीवन में मिठास घोलती है। इस दिन बेटियां मायके और ससुराल में ढोल की गूंज और अलाव की गर्मी के बीच पूजन के साथ परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करतीं हैं।
लोहड़ी का पर्व हर्षोल्लास परंपराओं का अद्भुत संगम है। लोहड़ी पर विशेष रूप से भांगड़ा करके खुशियां मनाते हैं। ईश्वर से सुखदाई भविष्य की प्रार्थना करते हैं।
-अरजिंदर सिंह, गोला गोकर्णनाथ
लोहड़ी खुशहाली का प्रतीक है। रात में घरों में आग जलाकर उसके चारों ओर परिक्रमा कर गीत, संगीत, कीर्तन करते हैं। घर में विवाह होने या पुत्र आगमन पर विशेष आयोजन किया जाता है।
-मंजीत कौर
लोहड़ी पर अग्नि जलाकर उसमें प्रसाद के रूप में गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, गजक, मक्के के भुने हुए दाने डालकर सुख समृद्धि की कामना की जाती है। यह पर्व फसल के तैयार होने पर मनाया जाता है।
-मंजीत सिंह
लोहड़ी का विशेष महत्व है। लोहड़ी खुशियां मनाने और बांटने का प्रतीक माना जाता है। बड़ों के साथ युवाओं और नवविवाहित जोड़ों में लोहड़ी को लेकर काफी उत्साह रहता है।
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-यशपाल सिंह
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