लखीमपुरखीरी। श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित हरिकृष्ण शास्त्री ने भरत एवं प्रहलाद चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को स्वयं को ईश्वर सौंप देना चाहिए और कर्म के आधार पर कार्य करना चाहिए। जिस तरह प्रहलाद ने स्वयं को भगवान के सुपुर्द कर उनको प्राप्त कर लिया। ईश्वर कभी भी अपने भक्त का अहित नहीं होने देते। उन्होंने कपिलदेव भगवान की कथा और उनके द्वारा अपनी माता को गंगा सागर में मुक्ति का वर्णन किया। कथा व्यास ने कहा कि कन्या पूजन सभी को करना चाहिए। देश में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार पर कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का बढ़ता चलन अपराधों को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में रामचरित मानस और गीता सार पढ़ाया जाना चाहिए। इससे बच्चे संस्कारी बनकर समाज और देश के लिए उपयोगी साबित होंगे। आचार्य संजय मिश्रा, डॉ. आरपीएस चौहान, भानू सिंह, रजनी मिश्रा, वंदना सिंह, कौशल तिवारी, अनिल अमल, प्रदीप सिंह, पीयूष जायसवाल आदि मौजूद रहे। संवाद