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मनरेगा में गड़बड़ियां तमाम लेकिन तकनीकी सपोर्ट न मिलने से कार्रवाई करना हुआ मुश्किल

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लखीमपुर खीरी। ग्राम पंचायतों में वर्ष 2018-19 में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना से कराए गए कार्यों का सोशल ऑडिट कराया जा रहा है। अभी तक आठ ब्लॉकों में सोशल ऑडिट पूर्ण कराया जा चुका है, जिनमें बड़े पैमाने पर खामियां उजागर हुई हैं। कच्चे मार्गों पर मिट्टी पटाई के कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां मिली हैं, लेकिन सोशल ऑडिट टीम में कोई तकनीकी विशेषज्ञ न होने के कारण उन कमियों की रिपोर्ट तैयार नहीं हो पा रही है। इससे लाखों रुपये खर्च कर गड़बड़ियां पकड़ने की कवायद महज खानापूरी साबित हो रही है।
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लखीमपुर, नकहा, बेहजम, मितौली, बांकेगंज, पलिया, निघासन और रमियाबेहड़ ब्लॉक की 593 ग्राम पंचायतों में मनरेगा और पीएम आवास की जांच का काम सोशल ऑडिट टीमों ने पूरा कर लिया है। 10 ग्राम पंचायतों की जांच के लिए एक ऑडिट टीम को जिम्मेदारी दी गई। अब धौरहरा और बिजुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में सोशल ऑडिट होना है, जिसके लिए ऑडिट टीमों को भंसड़िया स्थित जिला ग्राम्य विकास प्रशिक्षण संस्थान में ट्रेनिंग दी जा रही है। अभी तक संपन्न हुए आठ ब्लॉकों के सोशल ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक लखीमपुर ब्लॉक में मनरेगा में 2.50 लाख रुपये का बोर्ड घोटाला पकड़ा गया है। अमानलाला समेत कई गांवों में बोर्ड के नाम पर खाते से रुपये निकाले गए, लेकिन मौके पर बोर्ड लगे हुए नहीं मिले। इसके अलावा पीरपुर गांव में पीएम आवास में गड़बड़ी पाई गई। इसी तरह नकहा ब्लॉक में अपात्रों को पीएम आवास देने के मामले सामने आए हैं। निघासन के ढकेरवा खालसा में फैमिली आईडी में नाम न होने के बावजूद अपात्रों को आवास दिए जाने का मामला ऑडिट में पकड़ा गया, लेकिन बीडीओ ने इसका बचाव किया है। ऐसी गड़बड़िया अन्य ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में मिली हैं।

टीम में तकनीकी सदस्य न होने से जांच सतही
सोशल ऑडिट टीम में चार सदस्य रखे गए, जिनमें एक सामान्य, एक ओबीसी, एक एससी और एक जाब कार्डधारक को जगह मिली है। इनकी न्यूनतम शैक्षिक योग्यता हाईस्कूल है और आयु सीमा 40 से 65 वर्ष है। टीम में कोई तकनीकी विशेषज्ञ नहीं है, जिससे मनरेगा के कार्यों में गड़बड़ियों की रिपोर्ट तैयार नहीं हो पा रही है। मनरेगा से कच्चे मार्गों पर मिट्टी पटार्ई का कार्य कराया जाता है, जिसकी ऊंचाई नापने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ की जरूरत पड़ती है। इसी में सबसे ज्यादा गड़बड़ी के मामले हैं, लेकिन तकनीकी विशेषज्ञ न होने से बड़े घोटालों के मामले जांच से छूट रहे हैं। इसके अलावा फोटो में 10 से 12 मजदूर कार्य करते दिखाई पड़ते हैं, लेकिन अभिलेखों और मस्टररोल पर 50 से 80 मजदूरों से काम कराने की सूचना मिली है।
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मनरेगा मजदूर से भी कम दिया जा रहा मानदेय
सोशल ऑडिट टीम के सदस्यों को एक ग्राम पंचायत के सभी मजरों में कराए गए विकास कार्यों की जांच करने के लिए बतौर पारिश्रमिक 500 रुपये मानदेय दिया जाता है। एक ग्राम पंचायत में ऑडिट कार्य पूरा करने में तीन दिन का समय लगता है, तब जाकर मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कराए गए कार्यों की रिपोर्ट तैयार होती है। सूत्र बताते हैं कि ऑडिट टीम के सदस्य को मिलने वाला यह अल्प मानदेय मनरेगा मजदूर से भी कम होने के कारण टीम के सदस्य भी कुंठित होकर खानापूरी कर रहे हैं। मनरेगा मजदूर को प्रतिदिन 182 रुपये मजदूरी (अकुशल श्रेणी) मिलती है। जबकि ऑडिट टीम के सदस्य कुशल श्रेणी में आते हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो कई गांवों में प्रधान ऑडिट टीम के सदस्यों को लालच देकर अपने मनमाफिक रिपोर्ट तैयार करा लेते है।

सोशल ऑडिट निदेशालय के निर्देशानुसार ग्राम पंचायतों में मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना का ऑडिट कराया जा रहा है। अभी तक आठ ब्लॉकों में ऑडिट कार्य कराया जा चुका है, जहां कई गांवों में गड़बड़ियां मिली हैं। अग्रिम कार्रवाई के लिए रिपोर्ट निदेशालय भेजी गई है। ऑडिट टीम में तकनीकी सदस्य की व्यवस्था नहीं की गई लेकिन विशेष परिस्थितियों में अन्य विभागों के तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेकर जांच कराई जाएगी।
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-अरविंद कुमार, नोडल अधिकारी, डीडीओ
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