फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुस्लिम राजा ने बनवाया था छोटी काशी का शिवालय

विज्ञापन
विज्ञापन
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी के शिवालय में स्थापित मृग रूपधारी शिवजी का श्रंग भगवान विष्णु ने स्थापित किया था। शिवालय का निर्माण कोटवारा रियासत के मुस्लिम महाराजा तरबियत हुसैन खां ने करवाया था। मंदिर के शिखर पर लगा दूज का चांद इसका प्रमाण है, जो लखनऊ के अलीगंज में पुराने हनुमान मंदिर के अलावा पूरे देश में कहीं देखने को नहीं मिलता है।
विज्ञापन

बराह पुराण में शिव जी द्वारा इस वन क्षेत्र में मृगरूप में बिहार करने और भगवान विष्णु द्वारा शिव जी का श्रंग यहां स्थापित करने का वर्णन है। पदम पुराण में कोटद्वार नगर अब कोटवारा ग्राम के गरीब ब्राह्मण सदानंद को श्रंग में साक्षात शिव के दर्शन होने की कथा वर्णित है।
पद्म पुराण में सदानंद ब्राह्मण द्वारा इस क्षेत्र में गोकर्ण, कोणार्क, पोनाग्र, भद्र एवं मांड कुंड की स्थापना एवं पंच तीर्थों में स्नान कर शिव जी का दर्शन पूजन रात्रि जागरण साधना करने से मनोवांछित फल प्राप्ति का विवरण प्राप्त होता है। इस पुराण में गोकर्ण क्षेत्र को तीनों लोकों एवं सातों द्वीपों में श्रेष्ठ कहा गया है।
विज्ञापन

बराह पुराण में वर्णन है कि वसुकर्ण नाम के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी सुशीला के साथ नित्य प्रति धूप दीप आदि के द्वारा गोकर्ण महादेव की 10 वर्षों तक साधना की थी, जिस पर भगवान शंकर उन पर प्रसन्न हुए और उन्हें रूपवान एवं गुणवान पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया था। भगवान की कृपा से उत्पन्न होने के कारण वैश्य दंपती ने अपने बेटे का नाम गोकर्ण रखा था, इसलिए यहां पर पुत्र प्राप्ति की इच्छा से काफी श्रद्धालु आते हैं।
विज्ञापन

अद्भुत है शिव धाम की विशेषताएं
-शिव मंदिर के शिखर की छाया कभी भी जमीन पर नहीं पड़ती।
- शिव मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश सिर झुका कर ही किया जा सकता है।
-गर्भ गृह धरातल से लगभग छह फुट नीचे है।
- शिव श्रंग गर्भ गृह से भी 3 फुट नीचे है।
- शिव श्रंग के बीच में खाली स्थान है, जिसे अहंकारी भक्त कभी नहीं भर पाते।
- शिव जी के ऊपर पीतल का जाल लगा है जिस पर ताला बंद रहता है।
- शिव जी के दर्शन सुबह मंदिर खुलने पर दोपहर पूजन सामग्री हटाने के बाद और रात्रि में श्रृंगार पूजा के समय ही होते हैं।
- शिव मंदिर में कभी प्रसाद नहीं बंटता, भक्तों के मस्तक पर चंदन लगा दिया जाता है।
-भारी वर्षा में गोकर्ण तीर्थ पानी से लबालब हो जाता है कई बार मंदिर का रास्ता भी पानी में डूब जाता है इसके बावजूद शिव मंदिर परिसर इससे अछूता रहता है।
- मंदिर परिसर में भंडारा करने वाले श्रद्धालु का भोजन तब तक समाप्त नहीं होता जब तक भंडारा करने वाला स्वयं भोजन न कर ले।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें