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बाघ के हमले में युवक घायल

Sat, 18 Mar 2017 10:47 PM IST
लखीमपुर, ब्यूरो
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बाघ के हमले में युवक घायल - फोटो : अमर उजाला
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साथियों ने जीतराम को बचाकर पहुंचाया डॉक्टर के पास
 जंगल में फूस काटने गए एक युवक पर बाघ ने हमला कर उसे जख्मी कर दिया। साथियों ने बमुश्किल युवक को बाघ के चंगुल से छुड़ाया।
नगर से सटे गांव नारंग निवासी 36 वर्षीय जीतलाल पुत्र पूजन अपने साथियों राम गुलाम और राम नरेश के साथ सुबह गांव के पास स्थित जंगल में छप्पर के लिए फूस काटने गया था। जंगल के कुछ अंदर जाकर ये तीनों थोड़ी-थोड़ी दूर पर घास काटने बैठे ही थे कि लगभग साढ़े दस बजे जंगल में छिपे बैठे एक बाघ ने जीतलाल पर हमला कर दिया। बाघ के हमले पर जीतलाल की चीख की आवाज सुनकर राम नरेश और रामगुलाम ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया और जीतलाल को बाघ के चंगुल से छुड़ाने दौड़े। दोनों ने वहां पहुंचकर बाघ पर हंसिया से वार करना शुरू कर दिया, तो बाघ जीतलाल को छोड़कर भाग गया।
दोनों साथी जख्मी जीतलाल को गांव लाए और वहां से उसे इलाज के लिए निजी चिकित्सक के यहां ले गए। हमले में जीतलाल की एक आंख, दाहिने हाथ और शरीर में अन्य जगहों पर पंजे के निशान हैं। उसकी हालत खतरे से बाहर है। मामले की सूचना पाकर नगर पंचायत अध्यक्ष अनीता यादव, सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नरेश यादव अस्पताल पहुंचे और जीतलाल की पत्नी को सांत्वना दी। मैलानी रेंज के वन दरोगा माया प्रकाश ने बताया कि कई बार कहने के बावजूद ग्रामीण घटनास्थल दिखाने नहीं पहुंचे। इससे घटना किस रेंज में हुई है, इसका पता नहीं चल सका है। मैलानी सेंक्चुरी रेंजर वीसी तिवारी ने बताया कि घटनास्थल स्पष्ट न हो पाने के बावजूद उनके स्टाफ वनरक्षक किशनपाल, श्यामलाल आदि ने अस्पताल पहुंचकर जख्मी युवक की हाल जाना। 
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अब भी सहमे हैं रामनरेश और रामगुलाम
मैलानी। बाघ के चंगुल से अपने साथी को छुड़ाने वाले रामनरेश और रामगुलाम ने बताया कि बाघ ने जीतलाल को दबोचा हुआ था। यह देख एकबारगी तो वे दोनों घबरा गए और वहां से जान बचाकर भागने का मन बना लिया, लेकिन फिर हिम्मत करके दोनों शोर मचाते और हाथ में हंसिया लिए जीतलाल के पास तक पंहुच गए। दोनों ने बाघ पर हंसिया से वार करना शुरू कर दिया। दोनों ने बताया कि बाघ के हंसिया लगा या नहीं, यह उन्हें पता नहीं, लेकिन बाघ जीतलाल को छोड़कर भाग गया। जीतलाल की जान बचाकर दोनों बहुत खुश हैं, लेकिन दोनों अब भी वह मंजर याद कर सिहर जाते  हैं।
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बाघ के हमले से भयभीत हैं ग्रामीण
मैलानी। नारंग गांव जंगल से थोड़ी ही दूरी पर है। बाघ के हमले में जीतलाल के जख्मी होने की खबर से ग्रामीण भयभीत हो उठे हैं। जीतलाल को देखने क्लीनिक पंहुचे कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके खेत जंगल के किनारे हैं। जंगली जानवरों से फसलों से नुकसान को बचाने के लिए लोग रात को फसलों की रखवाली करते हैं। अब फसलों की रखवाली कैसे होगी, यह चिंता उन्हें सता रही है।
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बाघ के हमले में पांच की जा चुकी है जान
मैलानी। मैलानी रेंज में पिछले साल जुलाई और अगस्त महीने में बाघ के हमले में अलग-अलग पांच लोगों की जान जा चुकी है। पांच लोगों की जान जाने के बाद वन विभाग ने आदमखोर बाघ को पकड़ा था।
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आदमखोर बाघ ने वर्ष 2016 सात जुलाई को मोहरैना के कक्ष संख्या सात में खरेहटा के साठ वर्षीय भोगन कश्यप, पंद्रह अगस्त  को सुवाबोझ वन ब्लाक में घास काटने गई कपरहां कुआं निवासी हिंछलाल की चौदह वर्षीय पुत्री सरस्वती, उन्नीस अगस्त को भरिगवां बीट के उत्तर कठिना कक्ष संख्या  एक की बाहरी सीमा से लगभग पांच मीटर अंदर जंगल में साठ वर्षीय टीकाराम, बीस अगस्त को भरिगवां बीट के आरक्षित वन क्षेत्र मोहरैना कक्ष संख्या आठ की बाहरी सीमा से लगभग दो सौ मीटर दूर खेत में पैंसठ वर्षीय बाबूराम और तीस अगस्त को भरिगवां बीट के आरक्षित वन क्षेत्र के उत्तर कठिना कक्ष संख्या एक बी  से लगभग दो  सौ मीटर उत्तर धान के खेत में पचपन वर्षीय जानकी प्रसाद को मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद वन विभाग ने बाघ को पकड़ा था।
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