- केस हल्का करने को तो नहीं बनाया नाबालिग को मुख्य आरोपी
वार्ड आया विंदेश्वरी हत्याकांड का पुलिस ने भले ही खुलासा कर दिया हो, लेकिन हत्याकांड को लेकर तमाम ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे साफ होता है कि पुलिस ने मृतका की नाबालिग पुत्री को मुख्य आरोपी बनाकर केस को हल्का करने और हत्याकांड में शामिल लोगों को बचाने की पूरी कोशिश की है।
शहर के मोहल्ला अर्जुनपुरवा निवासी सुुशील कुमार की बेवा विंदेश्वरी देवी अपनी नाबालिग पुत्री के साथ सरकारी आवास में रहती थी। 30 जून 16 की आधी रात विंदेश्वरी देवी की मुंह दबाकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने 17 अक्तूबर को घटना का खुलासा किया। खुलासे के मुताबिक नाबालिग पुत्री ने अपने फूफा और फूफा के साथी लेखपाल की मदद से हत्या की योजना बनाई और ढाई लाख रुपये की सुपारी देकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने नाबालिग पुत्री और सुपारी किलर महादेव प्रसाद को हत्या और आरोपी फूफा कालिका प्रसाद उर्फ बाद और लेखपाल मुन्नालाल को धारा 120बी का आरोपी बनाया है। पुलिस ने इस घटना का खुलासा भले ही कर दिया हो, लेकिन मुख्य आरोपी बनाने को लेकर उसकी भूमिका पर कई सवाल उठने लगे हैं। यदि मान लिया जाए कि नाबालिग पुत्री ने ही सुपारी देकर मां की हत्या कराई तो सवाल यह उठता है कि सुपारी देकर हत्या कराने का तरीका उसके जहन में कैसे आया। अगर वह अपनी मां से पीड़ित थी तो वह खुद भी कानून को हाथ में लेकर उसकी हत्या कर सकती थी। इससे साफ है कि उसे सुपारी देकर हत्या करने का प्लान किसी और ने तैयार किया और अपने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ के लिए लड़की को मोहरा बनाकर घटना को अंजाम दिया। ऐसे में पुलिस ने वारदात को अंजाम देने में मुख्य भूमिका बनाने वाले को मुख्य आरोपी क्यों नहीं बनाया। जानकारों की मानें तो नाबालिग लड़की को मुख्य आरोपी बनाकर पुलिस ने केस को हल्का करने की कोशिश की है। एसपी अखिलेश चौरसिया का कहना है कि लड़की की अहम भूमिका रही थी। उसी ने फूफा के साथ प्लान तैयार कर महादेव के साथ मिलकर अपनी मां की हत्या की थी।