मरीजों की जान से भी करते हैं खिलवाड़, टीएसआई और सदर पुलिस की नहीं पड़ती नजर
शहर में कई ऐसी प्राइवेट एंबुलेंस चल रही हैं, जो पुलिस की लाइट बार लगाकर सड़कों पर फर्राटा भरती हैं, लेकिन जेल गेट रोड और अस्पताल के पास खड़ी होने वाली इन एंबुलेंस पर पुलिस की नजर नहीं पड़ती। इतना ही नहीं यह एंबुलेंस चालक मरीजों की जान के साथ भी खिलवाड़ करते हैं। इन एंबुलेंस में न तो फर्स्ट एड बाक्स लगे हैं और न ही साथ में फार्मेसिस्ट हैं? यदि फर्स्ट एड बाक्स लगा भी है तो उसमें जरूरी दवाएं नहीं हैं।
शहर में करीब 25 से 30 प्राइवेट एंबुलेंस संचालित होती है। सुबह होते ही यह एंबुलेंस जेल गेट और जिला अस्पताल रोड पर खड़ी हो जाती हैं। मार्ग पर एंबुलेंसों के खड़े होने के कारण हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। इनमें कई एंबुलेंस ऐसी हैं, जिनमें पुलिस की रिवाल्विंग लाइट (लाइट बार) लगी हैं। इस मार्ग पर दिन भर चक्कर काटने वाली सदर कोतवाली पुलिस और टीएसआई की नजरें नहीं पड़ती। बताते हैं कि पुलिस की लाइटों का फायदा उठाकर कुछ एंबुलेंस चालक रात के अंधेरे में कई अवैध धंधे भी करते हैं, लेकिन महकमे का वाहन समझकर पुलिस भी इन्हें रोकने की जहमत नहीं उठाती। इतना ही नहीं मानकों को पूरा न करने वाली इन एंबुलेंसों के चालक मरीजों की जान से भी खिलवाड़ करते हैं। सेहत महकमे के लोगों की माने तो एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार पेटिका के अलावा एक फार्मेसिस्ट होना चाहिए। इसके अलावा फिल्टर के पानी की बोतल होनी चाहिए, जिससे मरीज को आक्सीजन फिल्टर कर दी जा सके, लेकिन किसी भी एंबुलेंस में फार्मेसिस्ट नहीं हैं, कई एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार पेटिका तक नहीं है। सूत्रों की माने तो एक-दो एंबुलेंस छोड़कर शेष एंबुलेंस एआरटीओ से पास भी नहीं हैं।
ऐसे चलता है लखनऊ के नर्सिंग होमों से खेल
शहर में पुलिस की रिवाल्विंग लाइट और हूटर लगाकर दौड़ रहीं एंबुलेंसों का खेल लखनऊ के कुछ नर्सिंग होमों से संचालित होता है। भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि शहर में करीब 19 एंबुलेंस लखनऊ के नर्सिंग होमों के मालिकों की हैं, जिन्होंने स्थानीय चालकों को दे रखी हैं। यह चालक जिला महिला अस्पताल और जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को दलालों के माध्यम से सस्ता इलाज कराने की बात कहकर झांसे में ले लेते हैं और उन्हें संबंधित नर्सिंग होम में ले जाते हैं। बताते हैं कि एंबुलेंस चालक को एक मरीज पर नर्सिंग होम संचालक 30 से 40 प्रतिशत तक कमीशन देते हैं।
अस्पताल स्टॉफ करता है मदद
एंबुलेंस चालकों को जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में तैनात स्टॉफ के कुछ लोगों का पूरा सहयोग मिलता है। एंबुलेंस चालक अपने कुछ दलालों और स्टॉफ के सहयोग से मरीजों के तीमारदारों को बरगला लेते हैं। इनमें महिला दलाल भी शामिल हैं। दोनों अस्पतालों में इन दलालों को किसी भी समय देखा जा सकता है।
क्या कहते हैं टीएसआई
टीएसआई ओमप्रकाश रजक का कहना है कि एंबुलेंस पर रिवाल्विंग लाइट लगाना गैरकानूनी है। एंबुलेंसों की जांच की जाएगी, जो एंबुलेंस अनाधिकृत रूप से चल रही हैं, या फिर नियमों को पूरा नहीं करतीं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एंबुलेंस के प्रपत्रों की कराई जाएगी जांच
एंबुलेंस का संभागीय परिवहन कार्यालय में रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इस जिले में करीब 57 एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन किया गया है। अनाधिकृत वाहनों को एंबुलेंस के तौर पर संचालित करने वालों का समय-समय अभियान में चालान किया जाता है। पड़ोसी जिलों से आने वाली एंबुलेंस के प्रपत्रों की जांच कराई जाएगी।
-पीके सिंह, एआरटीओ, प्रवर्तन