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रहस्यों में घिरा है सर्राफ परिवार का आत्मघाती कदम

Sat, 12 Sep 2015 05:22 PM IST
लखीमपुर खीरी
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पत्नी, बेटे और बेटी के साथ सल्फाज खाने वाले सर्राफ कृष्ण कुमार सोनी ने जिंदगी और मौत से जूझते वक्त उल्टियां और मल त्याग किया तो उसकी सफाई किसने की? ये सवाल शहर कोतवाल रंजीत सिंह यादव ने अपनी डायरी में मौके पर पहुंचते ही दर्ज किया। इतना ही नहीं मामले पर रहस्य की परतें चढ़ी हैं, लेकिन पुलिस को परिवारीजनों की ओर से तहरीर का इंतजार है। फिलहाल एक परिवार के चार लोगों के एक साथ बैठकर सल्फाज खाकर जान देने की घटना किसी के भी गले नहीं उतर रही है।
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मोहल्ला बहादुरनगर निवासी सर्राफ कृष्ण कुमार सोनी, पत्नी माया सोनी, पुत्र अंकुर और पुत्री रिशू ने 10 सितंबर की सुबह एक साथ सल्फाज खा ली थी, जिसमें माया अंकुर और रिशू को जिला अस्पताल ले जाने पर मृत घोषित कर दिया गया था, जबकि कृष्ण कुमार को लखनऊ रेफर किया गया था। लखनऊ में इलाज के दौरान 10/11 सिंतबर की रात करीब ढाई बजे सर्राफ कृष्ण कुमार ने भी दम तोड़ दिया था। एक ही परिवार के चार लोगों के इस तरह आत्महत्या करने और पांच सौ रुपये के स्टांप पर सुसाइड नोट में खुद को कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या का कारण दर्शाने की कहानी भी किसी के गले नहीं उतरी। सबसे अहम बात ये है कि सर्राफ का 22 वर्षीय पुत्र अंकुर बीटेक कर चुका था, जबकि 15 वर्षीय पुत्री रिशू इंटर की पढ़ाई कर रही थी वहीं पत्नी भी काफी हंसमुख और मिलनसार थीं। इस सबके बाद भी पूरे परिवार ने एक राय होकर सल्फाज कैसे खा ली? कोतवाल रंजीत यादव कहते हैं कि मौके की स्थिति को देखने से ऐसा लग रहा था कि कृष्ण कुमार ने सबसे बाद में सल्फाज खाई। ऐसे में हो सकता है कि उसने पत्नी और बच्चों को बताए बिना उन्हें पहले सल्फाज खिला दी हो? इसके बाद स्टांप पर सबके दस्तखत बना दिए? हालांकि शहर कोतवाल ने बताया कि सूचना पर जब वह घटनास्थल पर पहुंचे तो देखा कि कमरे की सफाई हो चुकी थी? इतना ही नहीं बाथरूम में पड़े सर्राफ की पत्नी और बेटी के कपड़े मल, मूत्र और उल्टी से सने थे। इसका मतलब किसी ने कमरे की न सिर्फ सफाई की, बल्कि पत्नी और बेटी के कपड़े भी बदले। पुलिस घटनास्थल पर की गई सफाई और कपड़ों की अदला-बदली को संदेह की नजर से देख रही है। कोतवाल का मानना है कि जब सर्राफ को आत्महत्या ही करनी थी तो उसने सफाई क्यों की? फिलहाल उन्हें तहरीर का इंतजार है। वह कहते हैं कि तहरीर आएगी तो मामले में हर पहलू पर जांच की जाएगी और घटना के पीछे जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई होगी।
सूदखोरों का भय हो सकता है तहरीर न दिए जाने का कारण
सर्राफ के परिवार में उनके भाई अशोक, सर्वेश, मनीश तथा भतीजे भी हैं। भाई सर्वेश और मनीश की माने तो प्रापर्टी के तौर पर उनकी दो दुकानें और यही मकान है, जिसमें वे रहते थे। कृष्ण कुमार के प्लाट की बाबत उन्हें सिर्फ इतना पता है कि शायद वह बिक चुका है। उन्होंने कहां, प्लाट खरीदा था और किसे बेचा? इस बाबत किसी को कुछ नहीं पता। भाइयों का तहरीर की बाबत कहना है कि उन्हें किसी पर कोई संदेह नहीं है। कृष्ण कुमार ने परिवार समेत आत्महत्या की है तो तहरीर का क्या मतलब? मोहल्ले वालों में इस बात की भी सुगबुगाहट है कि तहरीर न दिए जाने का कारण सूदखोरों का भय हो सकता है, क्योंकि जो कार्रवाई के लिए आगे आएगा, उसे उनका कर्ज भी चुकता करना पड़ सकता है।
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पांच सौ रुपये के स्टांप की कहानी भी अजीबोगरीब
किसी आत्महत्या करने वाले ने शायद पहली बार ऐसा किया होगा कि वेंडर से पहले पांच सौ रुपये का स्टांप खरीदा और फिर सुसाइड नोट लिखकर परिवार समेत हस्ताक्षर बनाए और सल्फाज खा ली। यह उस अवस्था में किया गया, जबकि सर्राफ की आर्थिक स्थिति इस लायक भी नहीं बची थी कि वह कोई राशि अनावश्यक व्यय करे। ऐसे में पांच सौ रुपये के स्टांप का खरीदा जाना भी अजीबोगरीब प्रतीत होता है।
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