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सपा विधायक पर दर्ज मुकदमे की विवेचना ट्रांसफर

Mon, 12 Oct 2015 07:54 PM IST
लखीमपुर खीरी
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पुलिस चौकी बिजुआ के इंचार्ज धर्मेंद्र शुक्ला की ओर से सत्तारूढ़ दल के विधायक सुनील भार्गव लाला समेत तीन लोगों पर संगीन धाराओं में दर्ज कराई गई रिपोर्ट की विवेचना एसपी अखिलेश चौरसिया ने थाना मितौली से ट्रांसफर करते हुए थाना प्रभारी पलिया केपी सिंह को सौंप दी है। एसपी ने बताया कि मामले की निष्पक्ष विवेचना होगी।
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पंचायत चुनाव के प्रथम चरण के मतदान यानी नौ अक्तूबर को प्राथमिक विद्यालय मितौली के बूथ पर तैनात बिजुआ चौकी इंचार्ज धर्मेंद्र शुक्ला से शाम करीब पांच बजे के बाद कस्ता से सपा विधायक सुनील लाला, उनके भाई छोटे और कोटेदार रामचंद्र सहित 50 लोगों ने मिलकर मारपीट की थी। दरोगा ने थाना मितौली में तहरीर देकर मतदान प्रभावित करने,  उनका सर्विस रिवाल्वर लूटने का प्रयास करने, वीडियो कैमरा और मोबाइल तोड़ देने का आरोप लगाया था। मामले की रिपोर्ट उसी दिन दर्ज हो गई थी, किंतु विवेचना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी थी। इधर एसपी अखिलेश चौरसिया ने बताया, चूंकि थाना मितौली में विधायक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई और यहीं के वह रहने वाले हैं, इसलिए विवेचना प्रभावित न हो यह सोचकर मामले की विवेचना थाना मितौली से ट्रांसफर कर पलिया के प्रभारी केपी सिंह को दी गई है। उधर थाना पलिया के इंस्पेक्टर केपी सिंह ने बताया कि सोमवार की सुबह उन्हें विवेचना का आदेश मिल गया है। जांच शुरू भी कर दी है और दूसरे चरण के मतदान के तत्काल बाद वह मामले की विवेचना में तेजी लाएंगे।
...और चंद मिनटों में दरोगा पर दर्ज हो गया था मुकदमा
विधायक पर दरोगा द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे के चौथे दिन भी पुलिस विभाग में इस बात की चर्चा जोरों पर रही कि अपने कर्तव्यों का पालन करने वाले दरोगा धर्मेंद्र शुक्ला को विधायक समेत अन्य लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराने में चार घंटे लग गए, जबकि विधायक समर्थक के थाने में तहरीर ले जाते ही दरोगा पर दलित एक्ट समेत मारपीट आदि की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई।
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तो दरोगा पर दर्ज मुकदमे की चार्जशीट में फं सेगा पेंच
पूर्व शासकीय अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह गौड़ बताते हैं कि सीआरपीसी की धारा 197 के तहत सरकारी कार्य के दौरान लोकसेवक के खिलाफ यदि कोई मामला दर्ज किया जाता है तो मामले में चार्जशीट तब तक कोर्ट में नहीं दाखिल की जा सकती, जब तक राज्य कर्मचारी होने की दशा में राज्यपाल से और केन्द्रीय कर्मचारी होने पर राष्ट्रपति की मंजूरी न मिले। लिहाजा दरोगा पर दर्ज मुकदमे की चार्जशीट में राज्यपाल से अनुमति का एक बड़ा पेच होगा।
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