दुधवा नेशनल पार्क के उपनिदेशक और किशनपुर संक्चुरी के रेंजर की ओर दायर वाद में आरोपी रघुवीर, संजय, केवल, रमेश, मोहन, श्रीपाल और धर्मपाल को गिरफ्तार कर चीतल की सींग और खाबड़ की बरामदगी दिखाई गई थी। चार साल चले इस मुकदमे में वन विभाग की ओर से अधिवक्ता राकेश श्रीवास्तव और संजय राय ने पैरवी की। जबकि बचाव पक्ष की ओर से संजय सिंह ने दलील दीं। सीजेएम अनामिका सिंह चौहान ने सातों आरोपियों को दोषी करार देते हुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 9 के तहत चार साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना तथा धारा 27 के तहत तीन वर्ष का कारावास और 15000 रुपया अर्थदंड की सजा सुनाई। कारावास की दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। जबकि जुर्माना दोनों को मिलाकर 40000 रुपया अदा करना होगा।