दो बच्चों की जहर देकर हत्या का मामला, तफ्तीश में लापरवाही बरतने पर कोर्ट ने दिया आदेश
दो बच्चों की जहर देकर हत्या के मामले में शनिवार को फैसला आ गया। एडीजे हाजी अशरफ अंसारी को हालांकि सबूतों के अभाव में हत्यारोपी को बरी करने का फैसला सुनाना पड़ा, लेकिन अबोध बच्चों की जिस प्रकार हत्या हुई थी उसने हरेक की संवेदनाएं झकझोर दी। कोर्ट ने लापरवाही बरतने के लिए प्रथम दृष्टया विवेचक को दोषी पाते हुए उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
फूलबेहड़ थाना क्षेत्र के गांव कोठिया मजरा धनीरामपुरवा निवासी छेद्दू की मौत हो गई थी, उसकी मौत के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी उसकी विधवा गुड्डी देवी पर आ गई। इसी बीच 10 मई 2005 को तीनों बच्चों को जहर दिया गया, जिसमें संदिग्ध हालात में दो की मौत हो गई थी। गांव के चौकीदार शिवकुमार ने अज्ञात हत्यारोपी के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तत्कालीन थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह ने जांच शुरू की तो प्रेम प्रसंग का मामला पाते हुए बच्चों की मां गुड्डी देवी और प्रेमी मेवालाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इंडोसल्फान से मौत की पुष्टि हुई। अदालती सुनवाई के दौरान कथित साक्षी गवाही से मुकर गए तो हत्यारोपी गुड्ड़ी देवी की मुकदमा सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई, सबूतों के अभाव में अदालत ने शनिवार को मेवालाल को बरी करने का फैसला सुनाया, लेकिन परिस्थितिजन्य सबूतों को सिलसिलेवार ढंग से संकलित न करने पर विवेचक अमित सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए डीएम खीरी को आदेशित किया, फिलहाल इंस्पेक्टर अमित सिंह इस समय फैजाबाद एसएसपी के पीआरओ हैं।