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पुलिस के चेहरे पर तो कालिख पोत गए अपहरणकर्ता

Tue, 19 Jan 2016 10:38 PM IST
निघासन (लखीमपुर खीरी)।
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सिंगाही के गांव खैरीगढ़ से शनिवार रात अगवा की गई तीन बहनों का अपहरण करने वाले बदमाशों ने एक तरह से पुलिस के चेहरे पर कालिख पोत दी। लड़कियों ने अपनी चप्पल गिराकर क्लू छोड़ा, बदमाश लगातार घर पर फोन पर फिरौती की बात करते रहे और गांव से दस से बीस किमी के दायरे में ही रहे लेकिन लगातार कांबिंग का दावा करने वाली पुलिस लड़कियों को बरामद नहीं कर पाई। डीआईजी, एसपी, चार सीओ, 10 थानों की पुलिस, पीएसी, एसटीएफ, एसएसबी, सर्विलांस और साइबर एक्सपर्ट की टीमें भी बदमाशों की लोकेशन तक ट्रेस नहीं कर पाईं और बदमाश फिरौती की रकम लेकर आसानी से फरार हो गए। वह भी तब जब सीएम हाउस ने लड़कियों को बरामद करने के निर्देश दिए थे। पुलिस के आला अधिकारी जल्द बरामदगी का दावा करते रहे लेकिन स्थानीय पुलिस इसे मैनेज नहीं कर पाई।
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लड़की को छुड़ाने गए रिश्ते के मामा और एक अन्य व्यक्ति ने साफ साफ बताया कि लड़कियों को पांच लाख रुपये और दो लीटर पेट्रोल की फिरौती पर छोड़ा गया। सोमवार की रात करीब नौ बजे फिरौती की रकम लेकर रिश्ते के मामा प्रताप और नीलेश बैग लेकर बदमाशों के बताए गए स्थान भैरमपुर के पास अमुवा पुल पर पहुंचे। वहां एक बाइक पर सवार दो बदमाश मिले। बदमाशों ने पैसे की मांग की तो उन लोगों ने पहले अगवा हुई बहनों को दिखाने के लिए कहा। इस पर बदमाश रेलवे क्रासिंग के पास इन लोगों को लेकर गए। उसके बाद गन्ने के खेत और गांव को पार करते हुए जंगल में ही आम की बाग के पास पहुंचे। वहां से करीब चार किलोमीटर दूर चलने के बाद बदमाशों ने रुकने को कहा। उसके बाद उन लोगों ने अपने साथियों को बुलाया। पैसा और दो लीटर पेट्रोल लेने के बाद बदमाश तीनों बहनों उपमा, रोहिणी और संतोषी को ले आए। बदमाशों को दिए गए नोट एक हजार और पांच सौ के थे। सभी के सीरियल नंबर पहले से लिख लिए गए थे। प्रताप और नीलेश तीनों बहनों को एक ही बाइक पर बैठाकर वहां से लौटे। इस दौरान बदमाश रास्ता बताने के लिए रेलवे क्रासिंग तक आए, उसके बाद वह फायरिंग कर लौट गए। जब ये लोग बेलरायां चीनी मिल के पास पहुंचे, तो पुलिस की जीप आती हुई दिखाई पड़ी। उसके बाद वह लोग घर चले आए।

नहीं की कोई अश्लील हरकत, कहा, तुम तो मेरी बहन जैसी हो...
निघासन। खैरीगढ़ से अगवा की गईं तीनों लड़कियों के साथ बदमाशों ने कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया। फिरौती की रकम मिलने के बाद बदमाशों ने तीन लड़कियों के पैर छुए और कहा कि तुमसे हमारी कोई रंजिश नहीं है। मैं तो तुम्हारे पिता को अगवा करने आया था लेकिन मजबूरी में तुम लोगों को अगवा करना पड़ा। तुम तीनों में मेरी बहनों के समान हो। अपहरणकर्ताओं से छूट कर आईं तीनों बहनों ने यह बात मीडिया, पुलिस और परिवारीजनों को बताई।
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लेकिन भागने पर पीटा था...
रविवार की रात उपमा, रोहिणी और संतोषी ने भागने का प्रयास किया लेकिन बदमाशों को पता चल गया। बदमाशों ने तीनों बहनों की पिटाई कर दी। एक बदमाश ने सबसे अधिक उपमा को लात-घूंसों और जूतों से पीटा। इसके बाद डरी सहमी लड़कियों की हिम्मत पस्त हो गई। उसके किसी ने भागने की कोशिश नहीं की।  
सर्च अभियान जारी है..
एसपी अखिलेश चौरसिया ने कहा है कि परिवार वाले कह रहे हैं कि उन्होंने पांच लाख की फिरौती दी है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। हालांकि लड़कियां कैसे छूट कर आईं इस पर वह कुछ नहीं बोल रहे। कहा, पुलिस ने संदेह के आधार पर कुछ को हिरासत में लिया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।

केवल एक बार खाना दिया, एक कंबल में काटी रात
अपहरणकर्ताओं को मिल रही थी पल-पल की जानकारी, बदलते रहे स्थान
अमर उजाला ब्यूरो
निघासन (लखीमपुर खीरी)। सिंगाही के गांव खैरीगढ़ से शनिवार की रात को अगवा की गईं तीनों बहने सोमवार की रात सकुशल घर लौट आईं, जिसके बाद से कोल्हू व्यवसायी रामबली गुप्ता के घर लोगों का तांता लग गया। लोगों ने युवतियों से बदमाशों के बारे में जानकारी हासिल करने का प्रयास भी किया। 48 घंटे तक अपहर्ताओं के चंगुल में रहने के बाद घर लौटीं लड़कियों ने बताया कि उन्हें सिर्फ एक बार खाने के नाम पर घर की बनी सब्जी और मोटी रोटी दी गई। कड़ाके की ठंड में हल्के कंबल के सहारे एक पेड़ के नीचे तीनों बहनों ने दो दिन गुजारे। इस दौरान अपहर्ताओं ने तीनों बहनों को पीटा भी। मेडिकल की छात्रा उपमा की सबसे अधिक पिटाई की। नंगे पैर जंगल में रहने के कारण तीनों कांटे भी चुभे हुए हैं।
अमर उजाला से बातचीत में उपमा, रोहिणी और संतोषी ने बताया कि उनको अगवा करने के बाद बदमाश बाइक पर बैठाकर जंगल में ले गए। अपहरण के बाद बदमाशों ने उनकी आंखों में काली पट्टी बांध दी थी। छह बदमाश मंकी कैप से अपना पूरा चेहरा ढके हुए थे। इसके अलावा वे ट्रैक सूट पहने थे। आंखों के अलावा उनका कोई भी अंग दिखाई नहीं दे रहा था। बदमाशों ने घनी झाड़ियों के बीच से रास्ता बनाया और रेलवे लाइन के किनारे रखा। जहां रुके थे वहां से ट्रेन के गुजरने की आवाज आती थी। अपहरणकर्ताओं को गांव की पूरी जानकारी मिल रही थी और वह छह घंटे पर अपना ठिकाना बदल रहे थे। बदमाशों ने रविवार रात को घर की बनी मोटी रोटी और सब्जी खिलाई थी। इसके बाद न खाना दिया न ही पानी।

उपमा ने बुलवाया था प्रताप को
उपमा ने बताया कि बदमाश उनके पिता रामबली को फिरौती देने के लिए बुला रहे थे। उन लोगों ने उनकी बीमारी का बहाना करते हुए न आ पाने की बात कही। तब बदमाशों ने ईमानदार और बाइक चलाने वाले को फिरौती की रकम पहुंचाने के लिए कहा। तब उसने फिरौती के लिए प्रताप और नीलेश को फोन पर बुलवाया।  

रविवार की रात ही हुआ था सौदा
सूत्रों की माने तो रविवार की रात करीब नौ बजे फोन आने पर फिरौती की बात तय हो गई थी। पहले बदमाशों ने 50 लाख, दूसरी बार 30 और तीसरी बार फोन आने पर पांच लाख की फिरौती तय की।

मां को देख फफक पड़ी बहनें
रात करीब 10 बजे जब तीनों बहनें वापस घर आई, तो वहां पर मौजूद मां को देखकर फफक कर रो पड़ीं। उनका करुण रुदन सुनकर वहां पर मौजूद लोगों की भी आंखें नम हो गईं।

नए गिरोह ने दिया घटना को अंजाम
पुलिस सूत्रों और ग्रामीणों की माने तो इस घटना को नए गिरोह ने अंजाम दिया है। इन लोगों ने बग्गा की तर्ज पर क्षेत्र में लूट और फिरौती से क्षेत्र में दहशत फैलाने का दुस्साहस किया।
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