पुलिस एनकाउंटर में मारे गए पदुम भार्गव पर मैगलगंज थाने में लूट, आर्म्स एक्ट के कई मुकदमे दर्ज थे। इसके अलावा उसके खिलाफ जघन्य वारदात या गैंगस्टर जैसे मामले दर्ज नहीं थे। परिवार वालों के मुताबिक पुलिस की प्रताड़ना से बचने के लिए वह दिल्ली में रहकर नौकरी भी करने लगा था। परिवार वालों के मुताबिक करीब 30 साल पहले पदुम के पिता ताराचंद की हत्या कर दी गई थी। उस समय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।
मृतक की मां गंगाजली ने कोर्ट को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि पुलिस ने पदुम के खिलाफ लूट और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज कुछ मामलों का फायदा उठाते हुए 29 जून 2014 को लाइसेंसी असलहों से हत्या कर दी। फिर मामले को एनकाउंटर दिखा दिया गया। हालांकि पूरे प्रकरण में सपा विधायक सुनील कुमार लाला की भूमिका को लेकर अभी रहस्य बना हुआ है। यह सीओ की विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। मामला सत्ता पक्ष के विधायक और तत्कालीन एसओ से जुड़ा होने के कारण पुलिस कुछ भी बताने को तैयार नहीं है।
मजिस्ट्रेटी जांच में नहीं मिली राहत
पदुम एनकाउंटर मामले की मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई थी। इसमें 10 जुलाई 2014 तक लोगों को बयान दर्ज कराने के लिए समय दिया गया था, लेकिन परिवार वालों को कहीं से मदद नहीं मिली और न ही कोई जानकारी मिली।
तत्कालीन एसओ की हैदराबाद में है तैनाती
पदुम एनकाउंटर में मुख्य भूमिका निभाने वाले तत्कालीन एसओ विश्वनाथ यादव मौजूदा समय में हैदराबाद में बतौर एसओ तैनात हैं। ऐसे में कोर्ट के आदेश पर दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच कराना किसी चुनौती से कम नहीं है।