खीरी थाना क्षेत्र के गांव सरखनपुर में 22 फरवरी को हुए मजदूर रामखिलावन हत्याकांड में पुलिस की विवेचना आरोपियों के लिए मददगार बन गई है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों रामबहादुर और अनिल उर्फ नीरू को जेल भेजा है, लेकिन अन्य सात आरोपी जांच खुलेआम घूम रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मृतक रामखिलावन की पत्नी मनोरमा देवी तीन पुत्रियों को लेकर कभी ससुराल तो कभी मायके भटक रही है। जमीन न होने के कारण मृतक रामखिलावन की पत्नी लोगों के यहां मजदूरी कर अपना और बच्चों का पेट पालने को विवश है। रामखिलावन हत्याकांड के समय घटनास्थल पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को जल्द सभी आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी आरोपी नहीं पकड़े जा सके हैं।
बूढ़े पिता के कंधों पर आठ लोगों की जिम्मेदारी
रामखिलावन की हत्या से परिवार वालों को बुरा हाल है। उसके बूढ़े पिता श्रीकेशन पर मेहनत मजदूरी करके आठ लेागाें के परिवार का गुजारा करने की जिम्मेदारी आ गई है। बता दें कि रामखिलावन अपने पीछे पत्नी मनोरमा देवी, तीन पुत्रियों शिवानी (9), मोनिका (6) और शशि (3) को छोड़ गया है।
पुलिस की कार्यशैली से आहत है पिता
रामखिलावन की हत्या के बाद पुलिस की कार्यशैली से पिता श्रीकेशन संतुष्ट नहीं है। उसने बताया कि उसके बेटे के अधिकतर हत्यारोपी बाहर घूम रहे हैं, लेकिन पुलिस विवेचना की बात कह कर उन पर कार्रवाई नहीं कर रही है। इससे उसे भी खतरा है। उसकी कोई भी सुनने वाला नहीं है।
बदले की भावना से की गई थी हत्या
पुलिस के मुताबिक सरखनपुर गांव में डेढ़ साल पहले रामबहादुर के घर डकैती पड़ी थी। जिसमें फायरिंग के दौरान रामबहादुर के पुत्र को भी गोली लगी थी। इस मामले में रामखिलावन भी नामजद था और छह माह तक जेल काटने के बाद गांव लौटा था। इसी विवाद को लेकर 22 फरवरी को मजदूरी पर गन्ना छीलते समय दिनदहाड़े रामखिलावन की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। इस मुकदमे में रामबहादुर, अनिल, रामसिंह, जसकरन, जंगबहादुर, चंद्रिका, राजकुमार, संदीप और अवधेश आरोपी हैं।
सीओ सिटी एमपी सिंह ने बताया कि तहरीर और घटना में काफी अंतर है। फिर भी तहरीर मिलने पर नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। दो लोगों का चालान किया गया है। अभी जांच की जा रही है। तथ्य मिलने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।