जिले की नौ चीनी मिलों पर किसानों का नौ अरब से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है, लेकिन मिलों ने गन्ना किसानों को भुगतान के मामले में अड़ियल रवैया अपना रखा है। एसएपी की दर से किसी भी मिल ने भुुगतान नहीं किया है, बल्कि आठ मिलों ने 240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भी भुुगतान नहीं किया है। भुगतान के मामले में सबसे ज्यादा बजाज ग्रुप की तीन मिलें फिसड्डी बनी हुई हैं, जिन पर चार अरब 55 करोड़ 78 लाख 91 हजार रुपये बकाया है। जबकि सभी नौ मिलों पर नौ अरब नौ करोड़ 60 लाख रुपये बकाया है।
बता दें कि 27 मई 2015 को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की याचिका पर हाईकोर्ट ने तीन किस्तों 15 जून, 30 जून और 15 जुलाई तक 75 फीसदी गन्ना मूल्य भुगतान के आदेश चीनी मिलों को दिया था। चीनी मिलों ने इस आदेश को ठेंगा दिखाते हुए एक भी किस्त का भुगतान नहीं किया है। वहीं मंगलवार को कोर्ट में बकाया गन्ना मूल्य की बावत सुनवाई होनी है, लेकिन इसका चीनी मिलों को जरा भी डर नहीं हैै। क्योंकि अभी तक भुगतान में तेजी नहीं आई है। हालांकि पिछले सप्ताह डीएम किंजल सिंह ने चीनी मिल अध्याशियों के साथ बैठक कर भुगतान का शेड्यूल भी मांगा था, लेकिन इस कवायद का भी मिलों पर कोई असर नहीं हुआ हैै। खास बात यह हैै कि अजबापुर मिल ने एसएपी 280 रुपये के सापेक्ष 240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान कर दिया हैै। जबकि आठ मिलों ने 240 की दर से भी भुगतान करने में अड़ियल रवैया अपनाए हुए हैैं। भुगतान न मिलने से आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों की टकटकी मंगलवार को कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
मिलों पर बकाया
बजाज ग्रुप की गोला मिल पर एक अरब 64 करोड़ 53 लाख 72 हजार रुपये, पलिया पर एक अरब 66 करोड़ 47 लाख आठ हजार, खंभारखेड़ा पर एक अरब 24 करोड़ 78 लाख 11 हजार, ऐरा पर एक अरब 14 करोड़ 16 लाख 87 हजार, अजबापुर पर 49 करोड़ 72 लाख 23 हजार, कुंभी पर 89 करोड़ 85 लाख 57 हजार, गुलरिया पर 69 करोड़ 42 लाख 75 हजार, बेलरायां पर 66 करोड़ 15 लाख 17 हजार और संपूर्णानगर पर 64 करोड़ 48 लाख 50 हजार रुपये बकाया है।
चीनी मिलों पर भुगतान के लिए दबाव बनाया गया था, जिस पर कुछ भुगतान हुआ भी है। मंगलवार को कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी