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कर्ज से लदे सर्राफ ने परिवार समेत खाया जहर

Thu, 10 Sep 2015 10:41 PM IST
लखीमपुर खीरी
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लाखों रुपये के कर्ज में डूबे बहादुरनगर निवासी 45 वर्षीय सर्राफ कृष्ण कुमार सोनी ने गुरुवार को पूरे परिवार सहित जहर खा लिया। जहर खाने से सर्राफ की पत्नी, बेटे और बेटी की मौत हो गई, जबकि  सोनी को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम सदर आलोक वर्मा, सीओ सिटी एमपी सिंह, कोतवाल रंजीत सिंह यादव जिला अस्पताल पहुंचे। इस बीच फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सल्फास की पांच डिब्बी और सफेद पाउडर बरामद किया है। इसके अलावा कमरे से पांच सौ रुपये के स्टांप पर लिखा सुसाइड नोट भी मिला, जो कोतवाली पुलिस के कब्जे में है। सोनी पर कई दुकानदारों और सूदखोरों का 10 लाख रुपये से अधिक का कर्जा हो चुका था। उसने अपने बेटे की नौकरी के लिए भी सूदखोरों से उधार लेकर दलाल को 13 लाख रुपये दिए थे, जो फंस गए थे। इस घटना के पीछे यह भी एक वजह बताई जा रही है। सोनी की फूलबेहड़ में दुुकान है। इसके अलावा शहर की नमक मंडी में भी किराए पर सोनी की एक दुकान थी। विवाद के कारण मकान मालिक ने कुुछ दिन पहले उसमें ताला डाल दिया था।
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कृष्ण कुमार के परिवार में पत्नी माया सोनी, बेटा 22 वर्षीय अंकुर उर्फ आशीष सोनी और बेटी 15 वर्षीय रिशू सोनी मकान के एक हिस्से में रहते थे, जबकि अन्य तीन हिस्सों में उसके दो छोटे भाई और माता-पिता रहते हैं। बुधवार सुबह कृष्ण कुमार के घर से किसी के बाहर न आने पर परिवार के अन्य सदस्यों ने घर के कमरे में जाकर देखा तो अंदर का नजारा देखकर वे सन्न रह गए। कृृष्ण कुमार ने अपने भाई अशोक कुमार को बताया कि उसने सभी को जहर खिलाकर खुद भी जहर खा लिया है। करीब पौने नौ बजे कृष्ण कुमार समेत पूरे परिवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने माया सोनी, अंकुर सोनी और रिशू सोनी को मृत घोषित कर दिया। बाद में कृष्ण कुमार को लखनऊ रेफर कर दिया गया।
शहर कोतवाल रंजीत सिंह यादव ने बताया कि मौके से सल्फास की डिब्बियां और सफेद पाउडर मिला है, जिसकी जांच के लिए फोरेंसिक टीम ने नमूने ले लिए हैं। सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें कर्जे से परेशान होकर जहर खाने की बात कहते हुए परिवार के सभी चार सदस्यों ने उस पर हस्ताक्षर किए है। अन्य कारणों के बारे में भी जांच की जा रही है। परिवार की ओर से अभी कोई तहरीर नहीं मिली है।
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कर्ज, ब्याज फिर सट्टेबाजी ने सब छीना
लखीमपुर खीरी। शहर के मोहल्ला बहादुरनगर में सनसनीखेज सुसाइड केेस की मिस्ट्री अभी पूरी तरह सुलझी नहीं हैै, लेकिन मौजूदा हालात में छन-छनकर सामने आ रहे तथ्यों से कर्ज और उस पर सुरसा के मुंह की तरह बढ़ते ब्याज की कहानी सामने आई हैै। हालांकि सर्राफ ने कर्ज और ब्याज के कुचक्र से निकलने के लिए सट्टेबाजी में दांव आजमाया, लेकिन यहां भी उसे मात मिली। क्योंकि कुछ माह पहले मोहल्ला भटनागर कॉलोनी निवासी एक सट्टेबाज ने देनदारी से बचने के लिए आत्महत्या कर ली थी, जिससे सर्राफ को करीब पांच लाख का झटका लगा था।
बहादुरनगर निवासी सर्राफ कृष्ण कुमार सोनी किराए पर एक दुकान नमक मंडी में चला रहा था, जिस पर नौकर बैठता था। जबकि कृष्ण कुुमार फूलबेहड़ में सर्राफा दुकान चलाते थे। नमक मंडी वाली दुकान समेत बिल्डिंग को करीब दो साल पूर्व एसके ज्वैलर्स के शरद गुप्ता ने खरीद लिया था, जिसके बाद कृष्ण कुमार को दुकान खाली करने की चिंता सताने लगी थी। एक सप्ताह पूर्व सर्राफ ने नमक मंडी वाली दुकान खाली करने पर सहमति जता दी थी, जिसके एवज में शुक्रवार को शरद गुप्ता ने एक लाख 70 हजार रुपये भी दिए थे। इसका जिक्र सर्राफ ने सुसाइड नोट में किया है। बकौल शरद गुप्ता पैसा देने के बाद उन्होंने दुकान पर अपना ताला डाल दिया था और सोमवार को दुकान खाली होनी थी। इसके बाद सर्राफ कृष्ण कुमार का शरद गुप्ता से संपर्क नहीं हो सका। सर्राफ के परिवार वालों के मुताबिक कर्जा कितना और किस-किस का है, इस बारे में उन्होंने कभी ज्यादा जिक्र नहीं किया था। हालांकि जानकार बताते हैं कि शहर में ही कई दुकानदारों और सूदखोरों का 10 लाख से अधिक कर्जा हो चुका था। जबकि फूलबेहड़ इलाके भी काफी कर्जा था।
बेटे की नौकरी के लिए कर रहे थे रुपये का प्रबंध
जानकारी यह भी मिली है कि सर्राफ अपने बेटे अंकुर सोनी की नौकरी लगवाने के लिए फिक्रमंद थे, क्योंकि अंकुर की प्राइवेट जॉब छूट चुकी थी। लिहाजा हाल में शुरू हुई सरकारी नौकरी के लिए प्रयासरत थे, जिसमें किसी दलाल से 13 लाख रुपये देकर भर्ती कराने की बात भी चल रही थी। एक व्यापारी ने बताया कि सर्राफ कृष्ण कुमार ने 10 लाख रुपये व्यवस्था कर लेने की बात बताते हुए उससे तीन लाख रुपयेे उधार मांगे थे, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया था। लिहाजा यह भी एक कारण सुसाइड का हो सकता हैै।
तो सुसाइड का पहले से बना लिया था प्लान
सर्राफ कृष्ण कुमार ने आत्महत्या का इरादा शायद कई दिन पहले बना लिया था, जिसका खुलासा सुसाइड नोट कर रहा है। तभी उसने सुसाइड नोट लिखने के लिए 500 रुपये कीमत का स्टांप बुधवार को खरीदा था। खास बात यह है कि सर्राफ कृष्ण कुमार अपने परिवार समेत तीन दिन पहले कहीं बाहर गया था, जिसके बाद बुधवार को लौटे थे। इसके बाद स्टांप खरीदा गया, जिसके दूसरे दिन गुरुवार की सुबह पूरे परिवार ने एक राय होकर जहर खा लिया। माना जा रहा है कि सर्राफ ने परिवार के सभी सदस्यों को विश्वास में लेकर कहीं बाहर ही रणनीति बनाई थी, जिससे घर के अन्य सदस्यों को इस बात की भनक तक नहीं लग सकी। सुसाइड नोट में आत्महत्या के पीछे कर्जे और उस पर 10 प्रतिशत ब्याज कारण बताया है। साथ ही यह भी लिखा है कि परिवार के सदस्यों और नौकर को परेशान न किया जाए, क्योंकि हम लोग स्वेच्छा से सुसाइड कर रहे है।
लोगों के गले नहीं उतर रही सामूहिक सुसाइड
सर्राफ ने पहले बेटे, फिर बेटी और पत्नी को जहर खिलाया, जिसके बाद खुद जहर खा लिया। ऐसा डॉक्टरों का मानना है, क्योंकि सल्फास की तीक्ष्णता के मद्देनजर देर से जहर खाने के चलते सर्राफ अभी भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। परिवार वाले और मोहल्ले के लोग एक साथ सभी के जहर खाने की घटना पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। खासकर युवा बेटे और बेटी को जहर खाने के विवश करने के पीछे कौन सी मजबूरी होगी, इसकी तस्वीर अभी साफ होनी बाकी है।
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नगर पालिका की पूर्व सदस्य थीं माया
मृतका माया सोनी नगर पालिका परिषद लखीमपुर से शमसेरनगर वार्ड से एक दशक पहले सदस्य रहीं थीं और सामाजिक थीं।

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