- खराद का काम कर परिवार का करता था भरण पोषण
काम मंदा होने के चलते हो गया था कर्जदार
कोतवाली क्षेत्र के गांव जलालपुर निवासी खराद का काम करने वाले गांव निवासी 48 वर्षीय हरीराम वर्मा ने दुकान में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार घटना की वजह आर्थिक तंगी और कर्ज बता रहा है।
गांव निवासी नन्ही देवी ने बताया कि उनके पति हरीराम वर्मा रोज की तरह गुरुवार को भी सुबह उठे और करीब पांच बजे चाय दुकान पर भेजने की बात कहकर दुकान पर चले आए। सुबह आठ बजे के करीब पुत्र शिवम चाय लेकर दुकान पर पहुंचा तो दुकान का दरवाजा अंदर से रस्सी के सहारे बंद था। शिवम ने दराज से झांककर देखा तो उसके पिता का शव कुंडे से लटका हुआ था। शिवम ने घर आकर परिवार वालों को घटना की जानकारी दी, जिससे घर में कोहराम मच गया। परिवार वाले जब दुकान पर पहुंचे और दरवाजा खोला तो उसका शव छत के कुंडे पर रस्सी के सहारे झूल रहा था। मृतक अपने पीछे पत्नी नन्ही देवी, पुत्र 12 वर्षीय शिवम, 10 वर्षीय सोनू, सात वर्षीय सत्यम, पुत्री पांच वर्षीय सोनम को छोड़ गया है। हरीराम खराद का काम कर परिवार का भरण पोषण करता था। परिवार वालों का कहना है कि हरीराम को काम में घाटा हो रहा था। काम को पटरी पर लाने के लिए वह कई समूह चला रहा था। नोटबंदी के कारण काम मंदा होने के कारण वह कर्जदार हो गया था। इससे परेशान होकर हरीराम ने मौत को गले लगा लिया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने लगी तो गांव और परिवार के लोग पोस्टमार्टम न कराने की जिद पर अड़ गए, जिन्हें कोतवाल संतोष कुमार तिवारी, एसआई दिनेश कुमार यादव ने समझा बुझाकर शांत कराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।