जिल में जननी सुरक्षा को लेकर किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग को लक्ष्य में पूरी तरह से सफलता नहीं मिल पा रही है। मातृत्व सप्ताह में जिले में गर्भवती महिलाओं की जांच की गई तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले की कुल गर्भवती महिलाओं में लगभग चार हजार महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दायरे में हैं।
मातृ एवं शिशु रक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग जननी सुरक्षा योजना कार्यक्रम चलाता है इसके तहत प्रत्येक सीएचसी, पीएचसी तथा स्वास्थ्य उप केंद्रों पर नियमित जांच और टीकाकरण के कार्यक्रम होते हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल और उन्हें विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए नियमित कार्यक्रम चलाए जाते हैं। एएनएम से लेकर आशाओं तक की जिम्मेदारी होती है कि वे गर्भवती महिलाओं की नियमित देखभाल करें और किसी भी प्रकार की बीमारी मिलने पर उन्हें उचित सलाह दें तथा आवश्यक है तो स्वास्थ्य केंद्र तक ले जाएं। इस सबके बावजूद मातृत्व सप्ताह में हुई जांचों में बड़ी संख्या में हाई रिस्क प्रेगनेंसी के केस मिले हैं। जिले में कुल गर्भवती महिलाओं संख्या लगभग 42,925 है। मातृत्व सप्ताह में हुई जांच में लगभग 4,139 महिलाएं हाई रिस्क दायरे में मिली हैं। इन हाई रिस्क महिलाओं में लगभग 2,497 महिलाएं गंभीर एनीमिया से ग्रसित हैं।
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ये हैं हाई रिस्क के कारण
जिले जांच में अधिकतर महिलाओं में खून की कमी, हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कम वजन, कम उम्र में गर्भवती होना तथा अधिक उम्र में गर्भवती होने के अलावा अधिक बच्चे हैं।
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क्या कर रहा है स्वास्थ्य विभाग
इस संबंध में एनआरएचएम प्रभारी डॉ.वीबीराम ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से गर्भवती महिलाओं की देखभाल करता है इसके बावजूद कुछ महिलाएं खान-पान का ध्यान नहीं रखती हैं इससे बीमारियां बढ़ती हैं जो हाई रिस्क महिलाएं मिली हैं सबको ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच कराकर दवाएं दिलाई गई हैँ। सलाह दी गई है हर महीने जांच कराएं। गंभीर एनीमिया वाली अधिकतर महिलाओं को आयरन का इंजेक्शन लगवाया गया है। सभी का टीकाकरण करा दिया गया है। इसके अलावा संबंधित एएनएम को निर्देेश दिए गए हैं कि हाई रिस्क वाली महिलाओं को प्रत्येक माह सीएचसी और पीएचसी में दिखवाएं।