लालच और दबाव ने बनाया दरिंदा
वर्ष 2010 में पत्नी और चार बच्चियों की निर्मम हत्या करने वाले रामानंद को जिला जज ने फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराज सिंह यादव ने बताया कि धौरहरा थाना क्षेत्र के ग्राम नामदारपुरवा मजरा अमेठी निवासी रामानंद उर्फ नंदलाल भारती का अवैध संबध गांव की ही एक अविवाहित युवती से था, उसके संबध के चलते जब युवती गर्भवती हो गई तो उस पर विवाह करने का दबाव बनाने लगी। इसी बीच पहले से विवाहित रामानंद ने 21/22 जनवरी 2010 की आधी रात को अपनी पत्नी 35 वर्षीय संगीता, पुत्री सात वर्षीय तुलसी, पांच वर्षीय लक्ष्मी, तीन वर्षीय काजल, तथा डेढ़ महीने की अबोध बच्ची की बांका से खांदकर हत्या कर दी थी। घटना को नाटकीय मोड़ देते हुए अज्ञात बदमाशों द्वारा हमला कर पत्नी और अबोध बच्चियों की हत्या कर झोपड़ी में आग लगा देने की कहानी बताई थी। एक ही परिवार के पांच महिला सदस्यों की निर्मम हत्या के मामले की जब पड़ताल हुई तो हकीकत सामने आ गई। रामानंद के कब्जे से खून से सने कपड़े भी बरामद हुए थे। मामला साबित करने के लिए अभियोजन की ओर से शंभू रैदास, प्रताप, बाबूराम हंस, रामकुमार,डा.एके वर्मा सहित दस साक्षियों ने अपनी गवाही दर्ज कराई थी। जिला जज राजबीर सिंह ने इस मामले में रामानंद को दोषी पाते हुए मृत्यु दंड की सजा सुनाई है साथ ही उस पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।