मोहल्ला राजगढ़ निवासी चंद्रशेखर नलकूप विभाग में अवर अभियंता थे। वह जुलाई 2014 में रिटायर हुए। उनके मोबाइल पर फरवरी 2014 में आई कॉल पर उन्होंने अपने बेटे दुर्गेश शेखर के नाम पर दो इंश्योरेंस पालिसी बुक की। इसके कुछ दिन बाद विनय कुमार इंदौरा नामक व्यक्ति ने खुद को इंश्योरेंस कंपनी का मैनेजर बताकर 10 लाख रुपये बोनस का झांसा दिया। इसके बाद अलग-अलग नामों से कई कॉल आई। इंजीनियर ने पॉलिसी लेने के लिए चेक के माध्यम से पैसे जमा किए। आरोपियों ने अलग-अलग नामों से नौ फर्जी कंपनियां बनाकर पीड़ित चंद्रशेखर से कंपनी सीटूसी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर एक लाख 80 हजार के तीन चेक यानी 5.40 लाख रुपये जमा कराए गए। इसके बाद एक-एक लाख के तीन चेक इसी कंपनी और अन्य कंपनियों के नाम पर और चेक जमा कराए गए। चंद्रशेखर से कुल 17.50 लाख रुपये जमा कराए गए। चेक कोरियर से दिल्ली के पते पर भेजे गए। चंद्र शेखर ने ठगी की जानकारी होने पर पुलिस को तहरीर देकर 10 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मामले को काफी समय ठंडे बस्ते में डाले रखा। इंजीनियर की गुहार पर एसपी अखिलेश चौरसिया ने मामले की जांच एलआरपी चौकी इंचार्ज मनोज सिंह को सौंपी, तो केस की कड़ियां खुलने लगीं। विवेचक मनोज सिंह ने बताया कि पकड़े गए आरोपी विनय कुमार इंदौरा, रवि कुमार दौलत, आकाशदीप खार्यन, राकेश चंद्र वर्मा ने फर्जी कॉल सेंटर दिल्ली में खोल रखा था। इन्हीं कंपनियों के नाम पर इंजीनियर से पैसे जमा कराए गए थे। सीटूसी साल्यूशन के नाम पर कोरियर से जो चेक भेजे गए थे उस पते और एकाउंट नंबर की छानबीन की गई। यह एकाउंट राकेश कुमार के नाम पर था जिससे उसका मोबाइल नंबर हासिल हुआ। इस मोबाइल नंबर को ट्रेस कर पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।
फर्जी नामों से कॉल करते थे आरोपी
चंद्रशेखर ने करीब 10 नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें अधिकांश नाम फर्जी निकले हैं। सिर्फ एक नाम विनय कुमार इंदौरा ही सही पाया गया। पूछताछ में ठगों ने बताया कि काल सेंटर में काम करने वाले वर्कर्स से कॉल कराता था।