दुधवा का मोहन हाथी एक को उतार चुका है मौत के घाट
दुधवा नेशनल पार्क का मोहन हाथी एक फिर चर्चा में है। इस बार फिर उसने अपने एक सेवक चारा कटर को शिकार बनाकर दुधवा में सनसनी मचा दी है। इससे पहले भी उसने एक चारा कटर को मौत के घाट उतार दिया था। फिलहाल दुधवा में सभी सकते में हैं। पुलिस ने मृतक चारा कटर का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
दुधवा नेशनल पार्क की सोनारीपुर रेंजर के सलूकापुर में रह रहे यहां के पालतू हाथी मोहन को अन्य हाथियों के साथ वृहस्पतिवार की शाम को 37 वर्षीय दैनिक कर्मी-चारा कटर रंजीत मूल निवासी ग्राम पांडा निवादा काशीपुर कानपुर देहात रोजाना की ही तरह गैंडा पुनर्वास क्षेत्र में ले गया था। मोहन के साथ सभी हाथी वापस हाथियों के स्थल तक आ गए लेकिन रंजीत नहीं लौटा। उसकी तलाश जारी थी। सुबह उसका शव गैंडा पुनर्वास परिक्षेत्र में पाया गया। इस दौरान डीडी महावीर कौजलगि भी पहुंच गए और शव को देखा। यहां निरीक्षण में पता चला कि वह हाथी के हमले में मरा है और वह काफी देर मोहन हाथी के साथ अकेले था जिसमें वह उसके जख्म पर दवा लगा रहा था। रंजीत का शव मिलते ही साथी कर्मियों, महावतों, चारा कटरों में शोक की लहर दौड़ गई तो वहीं मोहन से दहशत भी। बता दें कि कई माह पूर्व इसी हाथी ने सेवा कर रहे चारा कटर छोटे लाल को पटक कर मार दिया था। इसके बाद इस दूसरी घटना ने पार्क कर्मियों में दहशत पैदा कर दी है।
पार्क अधिकारियों ने इस दूसरी घटना के बाद मोहन की निगरानी बढ़वा दी है। अब मोहन अपने स्थल पर ही रहेगा और इसके साथ ही चारा कटर व महावत विशेष निगरानी करेंगे। महावतों को इसके लिए निर्देशित किया जा चुका है कि वह उसके व्यवहार में जरा सा भी बदलाव देखें तो जानकारी दें।
जू में अभी नहीं भेजा जाएगा मोहन
मोहन हाथी के दो मौतों को अंजाम देने के बाद उसको किसी जू आदि में भेजे जाने के उठ रही चर्चाओं पर पार्क अधिकारियों ने विराम लगा दिया है। अधिकारियों की मानें तो पहले हादसे के कारणों पर गौर किया जाएगा ताकि पता चल सके कि किन परिस्थितियों में उसने चारा कटर को मारा है उसके बाद आगे कोई निर्णय लिया जाएगा।
चारा कटर मोहन हाथी को गैंडा पुनर्वास क्षेत्र में ले गया था जहां उसने उसको मार दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। नियमानुसार मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। फिलहाल मोहन सलूकापुर में रहेगा और उसकी निगरानी बढ़ा दी गई है। हादसे के कारणों की जांच की जाएगी।
महावीर कौजलगि, डिप्टी डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क
मस्ती के मूड में हों हाथी तो काबू नहीं कर पाते महावत
पलियाकलां। पालतू हाथी कभी किसी की जान नहीं लेते, लेकिन एक दौर ऐसा भी होता है जब हाथी खतरनाक हो जाता है और वह अपने ही महावत को मौत के घाट उतार सकता है। यह मौका उनके मस्त मूड का होता है, जिसमें वह जरा भी किसी के बाधक बनने पर हमलावर हो जाते हैं। कई हादसों में इसकी पुष्टि हो भी चुकी है।
यह जानकारी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के उत्तर प्रदेश और बिहार कोआर्डिनेटर डॉ. मुदितढ़ गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि पालतू हाथियों का स्वभाव जंगली हाथियों से बिलकुल अलग होता है। उनके मुताबिक पालतू हाथी से जानलेवा बर्ताव की उम्मीद नहीं होती है, लेकिन एक दौर आता है जब वह मस्त मूड में होते हैं तो काफी घातक हो जाते हैं और इस दौरान महावत द्वारा काबू करने के दौरान काबू खो बैठते हैं। इसका नतीजा किसी की जान भी जा सकती है। इस दौरान बचाव का उपाय सिर्फ सावधानी ही होता है जो महावत को बरतनी होती है। बस वह उसके मूड की पहचान कर सकें।