58 मरीज देखे लेकिन गंभीर घायल को देखने में लगाया कानूनी अड़ंगा
ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की नहीं जागी संवेदना
एंबुलेंस पहुंची लेट, पैसे मांगने का भी आरोप
धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर चाहते तो चखरा निवासी भल्लर की जान बचाई जा सकती थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को मानते हुए डाक्टर ने अगर भल्लर को थाने भेजने के बजाए उसका इलाज शुरू कर दिया होता, शायद उसकी जान बच जाती है। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर एवं अन्य स्टाफ की मानवीय संवेदना तक नहीं जागी और भल्लर की असमय मौत हो गई। गया। डॉक्टरों की इस कार्यप्रणाली से लोगों में रोष व्याप्त है।
लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए एक तरफ प्रदेश सरकार करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे कर रही है, दूसरी तरफ इन सेवाओं का लाभ गरीब तबके के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। भल्लर को लाने में एंबुलेंस ने डेढ़ घंटे देरी कर दी। मृतक के बेटे लक्ष्मीनारायण ने बताया कि 9.35 बजे उसने एंबुलेंस के लिए 108 पर फोन किया। आरोप है कि करीब सात मिनट बाद एंबुलेंस चालक ने आधे घंटे बाद चखरा पहुंचने की बात कहकर फोन काट दिया। करीब डेढ़ घंटे बाद वह चखरा पहुंचा। ग्रामीणों के मुताबिक चार पहिया वाहन से चखरा पहुंचने का रास्ता 20-25 मिनट का है। इसके बावजूद वह दो घंटे बाद पहुंचा। इसके बाद चखरा से सीएचसी लाने का पैसा एंबुलेंस चालक मांग रहा था। न देने पर पहले उसने गाड़ी में डीजल न होने की बात कह टालने का प्रयास किया। बाद में कहा कि सीएचसी चलने के बाद वहां पर दे देना।
भल्लर का सीएचसी में पर्चा बन गया फिर भी डॉक्टर ने पल्ला झाड़ते हुए उसे थाने भेज दिया। भल्लर की पत्नी भगौता, बेटे लक्ष्मीनरायण तथा अनुज आदि ने भल्लर की हालत बिगड़ती देखकर डॉक्टर से कई बार अनुरोध भी किया, लेकिन डॉक्टर ने उनकी एक नहीं सुनी। थाने में हालत खराब होने पर उसे सीएचसी लाया गया। करीब तीन सौ मीटर की दूरी तय करने के दौरान भल्लर की मौत हो गई। वकील विवेक श्रीवास्तव, लतीफ अहमद आदि ने इलाज में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर को गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की है। कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
मौजीलाल को देख लिया था महिला संग
भल्लर के बड़े लक्ष्मीनारायण ने बताया कि उसका छोटा भाई अनुज गुरुवार की शाम अपने चाचा के यहां साइकिल मांगने गया था। वहां पर गांव का ही बीडीसी सदस्य मौजीलाल मौजूद था। लक्ष्मीनारायण का आरोप है कि अनुज ने मौजीलाल और एक महिला को आपत्तिजनक हालत में देख लिया। संबंधों का खुलासा न हो जाए, इस डर से मौजीलाल ने अनुज को धमकाया था। गुरुवार रात करीब 10 बजे बीडीसी मौजीलाल अन्य लोगों के साथ पहुंचा और घर के बाहर सो रहे पिता को पीटते हुए खड़ंजे पर घसीटा। चीख सुनकर भल्लर की पत्नी भगौता, छोटा बेटा अनुज वहां पहुंचा तो बीडीसी ने लाठी डंडों से उनको भी पीटा। मोहल्ले के लोग इकट्टा होने लगे तो आरोपी मौके से भाग निकला। मामले में खास यह हैै कि आरोपी मौजीलाल ने गुरुवार की रात में ही भल्लर और उसके दो पुत्रों लक्ष्मीनारायन तथा जयनरायन के खिलाफ एनसीआर दर्ज करा दी थी।
हंगामा देख भागे डाक्टर
ग्रामीणों का हंगामा देखकर डॉक्टर वहां से रफूचक्कर हो गए। घटना के करीब डेढ़ घंटे बाद पहुंचे विधायक केजी पटेल ने परिवार वालों को ढाढ़स बंधाया। उसके बाद वह लोग कमरा नंबर 10 में दरवाजा बंद करके बैठे डॉक्टर सुभाष वर्मा से मिले। विधायक ने डॉक्टर से बातचीत करने रहे थे, इसी दौरान डॉक्टर की टिप्पणी पर विधायक और नाराज हो गए। उन्होंने सीएमओ से डॉक्टर को सस्पेंड करने की मांग की। सीएमओ के कार्रवाई करने के आश्वासन के बाद ही विधायक शांत हुए।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी नहीं माना
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक यदि कोई घायल व्यक्ति थाने से पहले अस्पताल पहुंचता है, तो फौरन उसका इलाज किया जाए। इसके बाद में कानूनी आदि कार्रवाई होनी चाहिए। नियमानुसार डाक्टर घायल का इलाज करता और इसी दौरान मेमो बनाकर पुलिस को सूचना देने की कार्रवाई करता। लेकिन सीएचसी पर तैनात डाक्टर ने इसकी अनदेखी कर दी।
सूचना बोर्ड से कर्मचारियों के गायब
सीएचसी प्रभारी लालजी पासी के मुताबिक वह और डॉक्टर पीके रावत लखीमपुर मीटिंग में गए थे। यहां पर डॉक्टर सुभाष वर्मा, आरएन चौरसिया तैनात थे। इमरजेंसी की ड्यूटी डॉक्टर सुभाष कर रहे थे। इसके अलावा चीफ फार्मेसिस्ट सुरेंद्र राय के अलावा वार्ड ब्वाय राकेश और स्टाफ नर्स में कत्यानी तथा शैली तैनात थी। लेकिन बोर्ड पर किसी का भी नाम नहीं लिखा था। जबकि ड्यूटी पर तैनात डाक्टर और कर्मचारियों का नाम लिखा जाना चाहिए।
पुलिस पर भी भड़ास
हंगामे के दौरान ग्रामीणों ने डॉक्टर और पुलिस दोनों की लापरवाही मानते हुए जमकर भड़ास निकाली। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस थोड़ी सी भी गंभीरता दिखाती भल्लर बच सकता था। एसओ अमर सिंह, ढखेरवा चौकी इंचार्ज टीआर चौरसिया और झंडी चौकी इंचार्ज महेंद्र सिंह ने लोगों को शांत कराया।
मैं ड्यूटी पर था। घायल भल्लर को लाया गया था। मामला पुलिस का होने के कारण मैंने पहले उसे थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कहा था। उसकी हालत ज्यादा खराब नहीं लग रही थी। उसके पैर में चोट थी और वह अस्थमा का मरीज भी था। मेरी कोई गलती नहीं है।
- सुभाष वर्मा, चिकित्सक, सीएचसी निघासन
मैं मीटिंग के सिलसिले में लखीमपुर गया था। मुझे घटना की जानकारी मिली है। स्टाफ के लापरवाही की रिपोर्ट अधिकारियों को दी जाएगी।
- लालजी पासी, सीएचसी प्रभारी ॉ
प्रकरण संज्ञान में है। पुलिस केेस के मामले में भी डॉक्टर को पहले इलाज करना चाहिए, भले ही रिपोर्ट दर्ज न हुई हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में आदेश दे रखा है। सीएचसी में ऐसा क्यों और किन परिस्थितियों में हुआ, इसके लिए डिप्टी सीएमओ को जांच सौंपी गई है। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- अरुण कुमार, सीएमओ
तहरीर के आधार पर आरोपी बीडीसी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। डॉक्टर के खिलाफ तहरीर नहीं मिली हैै।
- अमर सिंह, एसओ निघासन
डॉक्टर कर रहे हैं मनमानी
सपा विधायक केजी पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार डॉक्टरों के प्रति अतिसंवेदनशील है। बदायूं में सड़क हादसे में जब विधायक की मौत हुई तो उनको बिना देखे डॉक्टरों ने बरेली के लिए रेफर कर दिया था। उनकी भी मौत डॉक्टरों की लापरवाही के चलते हुई थी। जब सत्ता पक्ष के एक विधायक के साथ डॉक्टर ऐसा बर्ताव कर सकता है तो अन्य लोगों के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे, इसका अंदाजा भल्लर की मौत से लगाया जा सकता है। ऐसे डॉक्टरों की शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी।