जिले की अलग-अलग दो तहसील क्षेत्रों में कर्ज औैर गरीबी से तंग आकर एक
किसान समेत दो लोगों ने खुदकुशी कर ली। पलिया तहसील क्षेत्र के बेला गांव
निवासी किसान ने सूदखोरों की धमकी से तंग आकर जहर खा लिया। वहीं धौरहरा
तहसील के गांव रामलोक निवासी एक युवक ने गरीबी से तंग आकर फांसी लगाकर जान
दे दी।
पलियाकलां/मझगईं। गांव बेला निवासी कर्ज में डूबे एक किसान ने घर
में ही जहर खाकर आत्महत्या कर ली। दो बैंकों के साथ ही उस पर दो सूदखोरों
का भी कर्ज था, जो उससे रकम वापस न करने पर जमीन अपने नाम लिखवा लेने की
धमकी दे रहे थे।
बेला निवासी रामचंद्र गौतम के 28 वर्षीय पुत्र
रामखिलावन ने शनिवार को दिन में 11 बजे घर में रखा जहरीला पदार्थ खा लिया।
इससे उसकी हालत बिगड़ गई और मुंह से झाग निकलने लगा। इसी बीच उसकी पत्नी
आरती खेत से मवेशियों का चारा लेकर आ गई। पति को गंभीर हाल में देख कर वह
चीखने चिल्लाने लगी। आवाज सुनकर गांव के लोग वहां आए और रामखिलावन को
सीएचसी में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान किसान ने दम तोड़ दिया। पत्नी
आरती के मुताबिक उनके पति ने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या की है। आरती ने
बताया कि उसके पति ने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक नौगवां से दो लाख, किसान
सहकारी सेवा समिति से 30 हजार कर्र्ज ले रखा था। इसके अलावा तीन बीघा जमीन
दो सूदखोरों के पास डेढ़ लाख रुपये में गिरवी रखी थी। सूदखोर उस पर दबाव
बना रहे थे कि उनका रुपया लौटाओ, नहीं तो जमीन उनके नाम लिखो। गन्ना भुगतान
हो नहीं रहा था और पांच बीघा गेहूं और मसूर की फसल बारिश, ओलावृष्टि में
खराब हो चुकी थी। इससे किसान रामखेलावन की सारी उम्मीदें टूट गईं थीं। इसी
के चलते उसने आत्महत्या कर ली। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया
है। एसडीएम शादाब असलम ने पीड़ित पत्नी से वार्ता की और गांव जाकर भी
पड़ताल की है। एसडीएम ने बताया कि मृतक की पत्नी को पारिवारिक लाभ योजना का
लाभ दिया जाएगा। इसके अलावा भी जो मद्द होगी दिलाई जाएगी। एसडीएम ने कहा
कि किसान दुर्घटना बीमा का लाभ आत्महत्या की वजह से पत्नी को नहीं मिल
पाएगा।
धौरहरा। धौैरहरा तहसील और थाना ईसानगर क्षेत्र के गांव रामलोक
निवासी किसान बनवारी का पुत्र 32 वर्र्षीय रामू आर्थिक तंगी से त्रस्त था।
शुक्रवार की रात रामू करीब दो बजे घर से कहीं चला गया था। सुबह उसके घर
वालों ने रामू की तलाश की तो घर से 200 मीटर दूर सागौन के पेड़ से उसका
लटकता हुआ शव मिला। इसके बाद परिवार वालों ने पुलिस को सूचना दिए बगैर शव
का अंतिम संस्कार कर दिया। मृतक के पिता बनवारी ने बताया कि रामू के नाम
1.15 डिस्मिल भूमि थी, जिसमें उसने गेहूं बोया था जो बारिश और ओले की वजह
से नष्ट हो गई थी। रामू पर साधन सहकारी समिति चकलाखीपुर का 25 हजार रुपये
कर्जा भी था। पत्नी के इलाज में काफी पैसा खर्च हो चुका है। समिति के
कर्मचारी कर्ज अदा करने के लिए तगादा कर रहे थे, जबकि फसल नष्ट होने से वह
डिप्रेशन में रहता था।
...कर्ज के मर्ज में उलझता चला गया राम खिलावन
पलियाकलां।
बेला निवासी रामखिलावन कर्ज के मर्ज में यूं उलझता गया कि फिर सुलझने का
मौका नहीं मिल सका। 14 बीघा जमीन से गुजर-बसर करने वाले इस किसान ने जरूरत
पर नौगवां की इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से दो लाख रुपये का ऋण लिया, इसके
साथ ही उसने दो सूदखोरों के पास तीन बीघा जमीन भी डेढ़ लाख रुपये में
गिरवी रख दी। उम्मीद थी कि गन्ना भुगतान होगा तो बैंक का कर्ज चुकता कर
दिया जाएगा और गिरवी रखी जमीन छुड़ाने के लिए भी कुछ राशि जमा कर दी जाएगी
लेकिन ऐसा नहीं हुआ, गन्ना भुगतान अधर में लटक गया। घर में खाने तक के लाले
पड़ गए। तब उसने पांच बीघा जमीन में गेहूं और मसूर की फसल बोने का मन
बनाया। फसल बोने के लिए भी उसने कर्ज लिया। खाद, बीज के लिए भी समिति से 30
हजार का कर्ज लिया। गेहूं और मसूर की फसल तैयार हो रही थी कि इसी बीच कई
बार हुई बारिश और ओलावृष्टि ने इस आखिरी उम्मीद को भी तोड़ दिया। उसकी फसल
इस आपदा में बर्बाद हो गई। सूदखोर जमीन को छुड़वाने का दबाव बनाने लगे।
कर्जों की यही उलझन राम खिलावन को आत्महत्या की ओर ले गई।
.... जमीन बेचते-बेचते आत्महत्या?
राम
खिलावन कुछ जमीन बेच कर कर्ज उतारने की सोच रहा था। दाम अच्छा होने के
कारण कुछ जमीन बेचकर यह कर्ज आसानी से उतारा जा सकता था । उसने जमीन बेचने
का मन भी बनाया और ग्राहक की तलाश करने लगा फिर अचानक आत्महत्या कर लेना
लोगों को उलझा रहा है।
...पति की मौत के गम में सुधबुध खो बैठी है आरती
राम
खिलावन के सिवा उसकी पत्नी आरती का कोई भी सहारा नहीं था मौत की खबर मिलते
ही वह दहाड़े मारकर रोने लगी और फिर बेहोश हो गई। उसके एक लड़का और एक
लड़की है। पति ही घर का खेवनहार था और वह अब इस दुनिया में नहीं रहा। उसे
अब कर्ज उतारने कि फिक्र भी सता रही है।