कोतवाली क्षेत्र के गांव जुगनूपुर निवासी पट्टाधारक किसान भागीरथ की सदमे से मौत हो गई। वह जमीन पर दबंगों के कब्जा किए जाने से काफी परेशान रहता था। कुछ दिन पहले दबंगों ने गेहूं की फसल भी काट ली थी, जिसकी शिकायत तहसील दिवस में की गई थी। कोई कार्रवाई न होने से वह काफी आहत था।
ग्राम पंचायत जुगनुपुर के 73 किसानों को 30 जून 2009 में पट्टे की जमीन पर काबिज कराया गया था, तब से दूसरे पक्ष के लोग आए दिन पट्टाधारकों की फसल नष्ट करते आ रहे थे। इस बार भी पट्टाधारकों ने गेहूं की फसल बोई थी, जिसे दूसरे पक्ष के लोग काटने नहीं दे रहे थे। एसडीएम ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव पट्टाधारकों को गेहूं की बोई फसल उन्हें दिलाने के लिए पुलिस और तहसील प्रशासन के साथ कंबाइन लेकर खुद कटवाने गए थे, लेकिन कंबाइन खराब होने के चलते फसल कट नहीं पाई थी। इसका फायदा उठाते हुए 50 लोगों ने पट्टाधारकों की गेहूं की फसल को जबरन काट लिया था। इसकी शिकायत तहसील दिवस में आठ अप्रैल को भागीरथ, रामऔतार, सियाराम, रामकुमार, रामस्वरूप, मेवालाल सहित 25 पट्टाधारकों ने की थी, जिसमें आरोप लगाया था कि दबंगों ने जबरन गेहूं की फसल काट ली है। एसडीएम ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने एसओ धौरहरा को दोषियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए थे। कार्रवाई न होने पर बुधवार को पुन: डीएम को प्रार्थना पत्र दिया गया था। मृतक की पुत्री गीता ने बताया कि इस बात को लेकर उसके पिता काफी परेशान थे। बुधवार को खाना भी नहीं खाया था। गुरुवार की सुबह साढ़े छह बजे सदमे से उनकी मौत हो गई।
बच्चे हुए बेसहारा
धौरहरा। मृतक भागीरथ अपने पीछे तीन बच्चे छोड़ गया है। उसकी पत्नी की 11 साल पहले मौत हो चुकी थी। सबसे बड़ी 18 वर्र्षीय पुत्री गीता और उससे छोटे पुत्र 15 वर्र्षीय अजय और 12 वर्षीय राहुल हैं। पट्टे की चार बीघा भूमि के अलावा अन्य रोजी रोटी का जरिया भी नहीं था, जिसके चलते भागीरथ काफी परेशान रहता था। अब उसके बच्चों के सामने दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि भागीरथ ही एकलौता कमाने वाला था।