गुरुवार शाम खेेत से लौट रहा था बच्चा
गांव फरदहिया निवासी एक बच्चे को मगरमच्छ ने अपना निवाला बना डाला। वह गुरुवार को रामसागर झील के पास से अपने घर जा रहा था। शुक्रवार सुबह उसका अधखाया शव परिवार वालों को मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने का दबाव परिवार वालों पर बनाया, लेकिन परिवार वालों ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया। इस पर पुलिस वहां से बैरंग लौट आई।
फरदहिया निवासी सुंदर का 10 वर्षीय पुत्र रामरतन गुरुवार को अपने चाचा रामजीवन के साथ रामसागर तालाब के पास स्थित खेत पर गया था। रामजीवन ने करीब चार बजे रामरतन को रास्ते पर भरे पानी के कारण उसे सड़क पार करते हुए घर जाने को कहा और खुद खेत में रुक गया। देर शाम जब रामजीवन अकेला घर लौटा तो परिवार वालों ने रामरतन के न आने का कारण पूछा। इस पर रामजीवन ने बताया कि उन्होंने उसे पहले ही घर भेज दिया था। यह सुनकर परिवार वाले अनहोनी की आशंका से उसकी तलाश में जुट गए। उसका कहीं पता नहीं चल सका। शुक्रवार की सुबह तलाश करते हुए उसके परिवार के लोग रामसागर तालाब के किनारे पहुंचे। वहां पर उसका अधखाया शव मिला। शव के एक पैर को पूरी तरह से मगरमच्छ खा चुका था। शव देखते ही परिवार में कोहराम मच गया। गांव वालों ने मामले की सूूूचना पुलिस व वन विभाग के अधिकारियों को दी। घटना की जानकारी पहुंचे लुधौरी रेंजर रणवीर मिश्रा ने परिवार वालों को ढांढस बंधाते हुए पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी।
रामसागर झील पहले से घोषित है मगरमच्छ जोन
लुधौरी रेंजर रणवीर मिश्रा ने बताया कि रामसागर झील में सरयू और जौरहा नदी का पानी आता है। बरसात के दिनों में दोनों नदियों से बहकर मगरमच्छ आ जाते हैं। यहां पर चार साल पहले फरदहिया निवासी रामनाथ, इसके पहले भी इसी गांव के रामसजीवन को मगरमच्छ ने अपना निवाला बनाया था। वहां पर कई बार मगरमच्छ के झुंडों ने चरवाहों को भी दौड़ाया था, जिसके चलते इसे मगरमच्छ जोन घोषित किया गया था।