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घर से खेत खलिहान तक आग का खौफनाक मंजर

Mon, 21 Mar 2016 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, निघासन (लखीमपुर खीरी)।
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अाग - फोटो : अमर उजाला
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खैरीगढ़ अग्निकांड : तबाही का मंजर देख सिहर उठे लोग
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दुधारू मवेशी जले, दो सौ एकड़ गेहूं, गन्ना भी तबाह
सिर से छत छिनीं, खाद्यान्न और बर्तन भी जल गए 
धुएं के बीच बदहवासी में अपनों को खोजतीं रहीं निगाहें
खैरीगढ़ के भीषण अग्निकांड में पूरा गांव पहले आग की लपटों से घिरा रहा फिर वहां से उठे धुएं के बादलों ने अंधेरा कर दिया। घर ही नहीं खेतों में खड़ी फसल भी जलने से लोगों के सपने राख हो गए। जिधर नजर जाए वहां तबाही ही तबाही थी। सिर से छत छिन गई और लोगों ने रात खुले आसमान के नीचे गुजारी। आग और धुएं के इस खौफनाक मंजर के बीच लोग बदहवास होकर अपनों को खोजते रहे। किसी ने खेत में शरण ली तो धुएं के दमघोंटू माहौल में खेत में ही बेहोश होकर गिर पड़ा। तबाही का मंजर देखकर गांव में मची चीखपुकार के बीच हर व्यक्ति सिहर उठा।
जंगल के किनारे बसा खैरीगढ़ किसी कस्बे से कम नहीं है। यहां पर जरूरत का सारा सामान आसानी से मिल जाता है। इस गांव में हर तबके के लोग गुजर बसर करते हैं। दुकानदार हैं तो किसान भी। सोमवार को लोग अपने खेतों से काम करके घर लौटे ही थे कि अचानक आग ने पूरे गांव को तबाह और बर्बाद कर दिया। जिधर नजर उठाकर देखो उधर धुएं और आग की लपटों के सिवा कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। लोग आग से बचने के लिए इधर उधर भाग रहे थे उनको छुपने तक की जगह नहीं मिल रही थी। बाहर खेल रहे बच्चों का भी पता नहीं था। कई बच्चे उस समय मिले नहीं तो लोगों और बदहवास हो गए। हालांकि शाम तक लोगों ने अपने परिवार के लोगों को खोज लिया था। खेतों की तरफ भी लगी भीषण आग ने गांव वालों को उधर जाने से रोक रखा था। किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करें, किधर जाएं। सामान बचाने में लगे मवेशी जले, मवेशी बचाने में लगे तो खेतों में आग लग गई। कई किसानों का गन्ना और गेहूं खेत में खड़ा था और वह कटाई के इंतजार में था। गन्ने की फसल यह किसानों के लिए इस साल कई सपने पूरे करने वाली थी लेकिन अंधड़ से उठे शोलों में राख हो गई फसल से सारे सपने चूर-चूर हो गए। लोगों के घर में अन्न का दाना तक नहीं बचा। कई घरों में बर्तन भी काम लायक नहीं बचे। रात में आग पर काबू तो पा लिया गया लेकिन लोगों के आंसू लगातार बह रहे थे। तेज हवा के बीच नन्हें मुन्ने बच्चों को लेकर लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर थे। 
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गांव के अंदर हैं 13 कोल्हू 
खैरीगढ़ में गांव के चारों ओर करीब 13 कोल्हू लगे हुए हैं। इन पर गुड़ बनाने का काम लगातार चलता है। लोगों का आरोप है कि इन कोल्हुओं पर आग से बचाव का कोई इंतजाम नहीं है। 
इन लोगों पर बरपा आग का कहर
संतोष, कनौजी, श्रीराम, अहिबरन, तुलसीराम, रामचंद्र, मिश्री, शिवसागर, सर्वेश, बाबूराम, राजाराम, चुन्ना लाल, सोहन, जितेंद्र, बालकराम, चुरई, नरेश, अयनुल हक, अब्दुल शकील, कादिर, सियाराम, गुलजार, कयूम, मोबीन, मतीन, राजेश, राजाराम, बिंद्रा, चुन्ना, संतोष, जियाद्दीन, रामकिशोर, इब्राहिम, सुरेश निराला, अब्दुल हकीम, मोबीन, जाबिर, छोटू, सर्वेश, बिंद्रा, राजेश, संजीत, बाबूराम, छत्रपाल, बराती समेत गांव के चार सौ घर जलकर राख हो गए। 
2006 में भी आग का कहर झेल चुका है खैरीगढ़
खैरीगढ़ गांव में यह पहला अग्निकांड नहीं है। इसके पहले भी 2006 में करीब दो सौ घर गांव में घूरे की चिंगारी से जल गए थे। उस अग्निकांड को लोग भुला भी नहीं पाए थे कि आग ने दोबारा पूरे गांव को अपने आगोश में ले लिया। 
लोहिया गांव में चयनित हुआ है खैरीगढ़ 
खैरीगढ़ गांव को एक साल पहले लोहिया समग्र गांव के लिए चयनित किया गया था। यहां झोपड़ पट्टी आदि की संख्या अधिक होने के कारण लोग अबी आवास भी नहीं बना पाए थे कि आग ने पूरे गांव को तबाह कर दिया।
बेहोशी की हालत में खेत में मिली अनवरी 
घटना के करीब तीन घंटे बाद तक जब अनवरी पत्नी फजल नहीं मिली तो उसके परिवार में कोहराम मचा रहा। देर रात काफी तलाश करने के बाद वह गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर एक खेत में बेहोशी की हालत में पड़ी मिली। उन्हें उपचार देकर होश में लाया गया।
डॉक्टरों का पैनल पहुंचा खैरीगढ़ गांव 
अग्निकांड के बाद सीएचसी की पूरी टीम गांव खैरीगढ़ पहुंची। इसके अलावा मवेशियों के इलाज के लिए जानवरों के डॉक्टर भी पहुंचे। प्रशासन ने लोगों के लिए खाने आदि की व्यवस्था कराने के लिए कोटेदारों को भेजा है।
बसपा नेता ने दी सांत्वना
बसपा नेता व पूर्व सिंगाही चेयरमैन मोहम्मद कयूम ने गांव पहुंचकर लोगों को सांत्वना दी। उन्होंने आग से तबाह हुए लोगों की हरसंभव मदद करने का आश्वासन भी दिया। 
मानवता भी हुई शर्मसार
आग से झुलसे सरफराज वहीं पर तड़प रहे थे। उस समय लोगों की भीड़ लगी हुई थी। बाहर के लोग तमाशबीन बन कर खड़े रहे। कोई भी सरफराज को उठाकर इलाज के लिए नहीं भेज रहा था। थाने के एक सिपाही के कहने पर लोगों ने उन्हें सीएचसी पहुंचाया।
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नेता अधिकारी पहले पहुंचे और दमकल बाद में 
आग की सूचना पर नेता और अधिकारी तो गांव में पहले पहुंच गए लेकिन आग बुझाने के लिए दमकल दो घंटे बाद पहुंची। तब आग ने खेतों की तरफ रुख कर लिया और गेहूं गन्ने की फसल धू-धू कर जल रही थी। बताया गया कि दमकल विभाग की गाड़ी नई बस्ती बुद्वीपुरवा में लगी आग बुझा ही रही थी तब किसी ने खैरीगढ़ में आग लगने की सूचना दी। नई बस्ती में आग बुझाने में समय लगने के कारण दो घंटे बाद मौके पर दमकल की गाड़ी पहुंच सकी। बताते चलें बद्धीपुरवा में आग से चार घर जले हैं। 
टाइम लाइन
कब कौन पहुंचा
घटना : दो बजे
2.15 बजे एसओ सिंगाही संजय यादव पहुंचे
2.30 बजे तहसीलदार जगदीश सिंह
3 बजे सीओ मोहम्मद इब्राहिम के साथ निघासन पुलिस
3.10 बजे तिकुनियां पुलिस
3.20 बजे बसपा नेता मोहम्मद कयूम
4 बजे निघासन की दमकल गाड़ी
4.15 बजे एसडीएम लवकुमार
4.30 बजे अपर पुलिस अधीक्षक अष्टभुजा सिंह
5.30 बजे पलिया दमकल गाड़ी
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