पड़ोस में भजन-कीर्तन के कार्यक्रम में शामिल होने गए थे घरवाले
दाउदपुर कोरैया निवासी नरपत के घर में बुधवार देर रात लगी आग में उसकी 13 वर्षीय पुत्री की रहस्यमय हालात में जलकर मौत हो गई। हादसे के वक्त घर में तीन बच्चे थे जबकि बाकी सदस्य पड़ोसी के यहां चल रहे कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। आग में घरेलू सामान भी जलकर नष्ट हो गया। घटना की जानकारी पर पुलिस और तहसील प्रशासन ने मौका मुआयना किया।
सदर कोतवाली के त्रिकोलिया ग्राम पंचायत के मजरा दाउदपुर-कोरैया निवासी नरपत के घर बुधवार रात अचानक आग लग गई। इस आग में घर गृहस्थी के साथ ही उसकी पुत्री चांदनी की झुलसकर मौत हो गई। वहीं उसके एक बेटा झुलस गया। बताते हैं आग उस वक्त लगी जब नरपत परिवार के सदस्यों के साथ समीप ही रहने वाले भगौती प्रसाद के यहां कार्यक्रम में शामिल होने गया था। रात करीब ग्यारह बजे नरपत के घर से आग की लपटें उठती देख अफरातफरी मच गई।
बताते हैं आग में बच्चों को घिरा जान कर सभी के होश उड़ गए। गांव और घर वाले आग बुझाने में जुट गए। विक्की अपने पुत्र को बचाकर बाहर ले आया लेकिन चांदनी पर किसी की नजर नहीं पड़ी। आग कम होने पर किशोरी को झुलसा देख घर वाले आनन-फानन उसे जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सुबह सूचना पर कोतवाली पुलिस के साथ ही तहसीलदार सदर राजीव शुक्ला पहुंचे। उन्होंने मौका-मुआयना कर नुकसान का जायजा लिया तथा लेखपाल अतुल वाजपेयी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। तहसीलदार राजीव शुक्ला ने बताया कि आग का कारण ज्ञात नहीं हो सका है। पीड़ित परिवार को तात्कालिक सहायता दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर किशोरी की मौत का मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा।
चांदनी की मौत छोड़ गई कई सवाल
चांदनी की मौत अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई है। जो चर्चा के केंद्र बने हुए हैं। एक बेटी घर मे जिंदा जल गई, पर किसी को भनक तक न लगी। सवाल यह भी है कि आग में घिरी होने के बावजूद क्या उसने मदद की गुहार नहीं लगाई? आग से घिरे बच्चे के चिल्लाने पर भी किशोरी की नींद नहीं खुली? फायर ब्रिगेड को भी सूचना न देने की बात भी चर्चा में है।