जिला कारागार में क्षमता से अधिक बंदियों की मौजूदगी को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया दो बैरकों वाला दोमंजिला भवन बनकर तैयार है पर नए भवन में जाने वाले बंदियों की निगरानी के लिए कारागार प्रशासन के पास इतना स्टाफ नहीं है कि वह उन्हें नए भवन में स्थानांतरित कर सके। कारागार की निर्माणाधीन मेन वॉल भी इनमें बाधक बन रही है।
मौजूदा समय में कारागार में 1600 से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। बंदियों की इतनी संख्या कई वर्षों से बनी हुई है। वर्ष 2011-12 में शासन के निर्देश पर कारागार के पीछे की जगह पर दो अन्य बैरकों, पाकशाला, शौचालय की नींव रखी गई। करीब चार साल गुजरने के बाद दोमंजिला भवन बनकर लगभग तैयार है। अधिकारियों के मुताबिक इस भवन में 700 बंदियों को स्थानांतरित किया जाना है लेकिन बंदी रक्षकों की कमी के कारण बंदी नए भवन में स्थानांतरित नहीं किए जा रहे हैं। एक अधिकारी का कहना है कि कारागार में इन दिनों 70 बंदी रक्षक तैनात हैं। नए भवन में बंदियों के स्थानांतरण के बाद करीब 30 अन्य बंदी रक्षकों की जरूरत पड़ेगी। कारागार अधिकारियों ने इस बाबत लखनऊ स्थित आदर्श कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक को पत्र भी भेजा है, लेकिन अब तक बंदी रक्षकों की तैनाती नहीं की गई है।
बंदियों के स्थानांरतण के लिए दोमंजिला भवन लगभग तैयार है, कुछ काम बाकी है जो जल्द पूरा हो जाएगा। लेकिन हमारे पास नए भवन के लिए बंदी रक्षकों की कमी है। इस बाबत उच्चाधिकारियों को भी बताया गया है, लेकिन अभी नए बंदी रक्षक नहीं मिले हैं। बंदी रक्षकों के आने तक सभी बंदियों को पुराने कारागार में ही रखा जाएगा।
-एचआर दोहरे, कारागार अधीक्षक