गांव बरखेरवा निवासी सुशीला देवी (54) की हत्या घर के बाहर ही गांव के बीच में कर दी गई। एक दो नहीं कुल्हाड़ी से कई प्रहार कर उसको मार डाला गया। घटना सुबह नौ बजे के करीब होने के कारण ग्रामीणों ने कत्ल होते देखा होगा लेकिन किसी ने भी न तो उसे बचाने की हिम्मत दिखाई और न ही हत्यारों को पकड़ने की। घटना को अंजाम देने के बाद बेखौफ हत्यारे आलाकत्ल समेत फरार हो गए। पुलिस अब टीम बनाकर जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की बात कह रही है।
थाना फरधान के गांव बरखेरवा में रोज की तरह चहल-पहल थी, लेकिन सुबह नौ बजे देवर और भतीजों के हाथों सुशीला देवी की हत्या को अंजाम दिए जाने की घटना से पूरे गांव में अफरातफरी का माहौल हो गया। सूचना पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो किसी ने भी कुछ भी नहीं बताया। पुलिस को एक ने बताया कि वह तो खेत पर थे वहीं सामने ही रहने वाले वृद्ध ने बताया कि उन्हें कम दिखाई और सुनाई देता है, इसलिए कुछ भी नहीं जान पाए। इसी तरह ग्रामीणों ने बहाना बनाकर अपना-अपना झाड़ लिया। मौके पर पड़ा खून और मांस के लोथड़े हत्यारों के बेखौफ होने की गवाही दे रहे थे।
पहले भी हो चुके हैं रिश्ते के कत्ल
जिले में रिश्ते के कत्ल की यह घटना पहली नहीं है। इससे पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें अपनों ने ही न सिर्फ कत्ल कर दिया बल्कि लोगों ने देखते हुए भी हत्यारों को रोकने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।
04 अक्तूबर: थाना पसगवां के गांव भौनापुर में बूटा सिंह ने अपनी दो बेटियों की जहर देकर हत्या कर खुद भी फांसी लगाकर जान दी।
25 सितंबर: फूलबेहड़ क्षेत्र के गांव गुजारा निवासी गुड्डू ने मायके जाने के विवाद में पत्नी शिंकी की बगौड़ी से हत्या कर दी।
18 सितंबर: ईसानगर के गांव कुर्मियनपुरवा निवासी बदाली ने पत्नी सुदामा की गला दबाकर हत्या कर दी, फिर खुद भी फांसी पर लटक गया।
21 अगस्त: पसगवां के गांव बड़वारी मांग निवासी प्रेमचंद की चचेरे भाइयों ने संपत्ति के लालचर में कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी।