कोतवाली गोला का ग्राम भुड़वारा गोवंशीय पशुओं की हत्या कर उनके मांस की तस्करी के लिए कुख्यात है। खेतों और घरों में खुलेआम गोकसी होने के कारण दिनभर चील और कौओं के झुंड इस गांव के ऊपर मंडराते रहते हैं, किंतु पुलिस की शह या सुस्ती के चलते यहां कारोबार बेखौफ चल रहा है।
भुड़वारा गांव के समीप पहले स्लाटर हाउस बना था, जिसमें बड़े चौपाये पशुओं का चिकित्सकीय परीक्षण कर वध के बाद मांस की बिक्री की जाती थी। कई बार अधिकारियों ने यहां छापा मारकर मांस और खालें बरामद कर चुके हैं। धीरे-धीरे स्लाटर हाउस पर वध का काम ठप कर घरों और खेतों में गोकसी कर मांस की बिक्री की जाने लगी। स्लाटर हाउस का लाइसेंस 2004 में निरस्त हो गया था। अब इस गांव से प्रतिदिन मांस गोला सहित कई जिलों में बिक्री के लिए भेजा जाता है। पुलिस तस्करों को इस गांव से दूर यदा कदा वाहन समेत पकड़ लेती है किंतु भुड़वारा गांव में हो रही इस धंधे को बंद नहीं करा रही है। एक दशक से गांव में पुलिस द्वारा गोमांस पकड़ना तो दूर कोई छापा तक नहीं मारा गया है, जबकि गोला, हैदराबाद, मैलानी, खुटार थाना क्षेत्रों में प्रतिमाह इस गांव से मांस ले जाते तस्करों की गाड़ियां पकड़ी जाती हैं।
बाजारों से आते हैं पशु
भुड़वारा गांव में पशु गोला, मूड़ा सवारान, अजान और दुबग्घा सहित कई पशु बाजारों से दर्जनों की संख्या में खरीदे जाते हैं। खरीदे गए पशु झुंड के रूप में रात के अंधेरे में पैदल भुड़वारा ले जाए जाते हैं।
त्रस्त हैं ग्रामवासी
भुड़वारा के ग्रामीण बताते हैं कि पशुओं के गांव पहुंचने के बाद मांस तस्करों के पशुओं को देखने और भाव तय होने के बाद उन्हें मारकर मांस बिक्री किया जाता है। मांस तस्कर प्रतिदिन गांव में मौजूद रहते हैं किंतु पुलिस गांव जाने से ही कतराती है।
गोमांस भरे वाहन मालिकों का सुराग नहीं
ममरी। हैदराबाद थाना पुलिस ने शनिवार की सुबह गोमांस भरे दो वाहन पकडे़ थी। इन वाहन के मालिकों का पता अभी तक नहीं लगा पाई है।
एसओ अजय कुमार यादव ने बताया कि शनिवार की सुबह घेराबंदी के दौरान जिन दोनों चौपहिया वाहनों से करीब 22 क्विंटल गोमांस बरामद किया गया था, उन वाहनों को कोई पूछने तक नहीं आया है। उन दोनों कारों का रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर पता लगाया जा रहा है। प्लेट पर दर्शाये गये यह नंबर कहां तक सही है इसकी भी खोजबीन चल रही है।