उस पर एक टॉफी चुराने का शक था। शक जताने वालों ने बस इसी बात पर उसकी जान ले ली। 13 साल के बच्चे को इतना पीटा कि वह बीमार पड़ गया और रविवार सुबह अस्पताल में दम तोड़ दिया। इससे नाराज गांव वालों ने बिुजआ पुलिस चौकी घेर ली और राजमार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया। उन्होंने पुलिस पर आरोपियों से मिले होने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। गांव वालों का आरोप है कि पुलिस चौकी में एक सिपाही ने भी बच्चे की पिटाई की जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। लोगों का गुस्सा देखकर पुलिस के भी हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे आला अफसरों ने उन्हें शांत कराया और करीब चार घंटे बाद जाम खुलवाया। दबाव पड़ने के बाद पुलिस ने आरोपी दुकानदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। गांव वाले आरोपी सिपाही के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। बच्चे की मां ने भी पुलिस पर पिटाई का आरोप लगाया है, हालांकि जो तहरीर दी गई है उसमें पुलिस की पिटाई का जिक्र नहीं है।
भीरा थाना की पुलिस चौकी बिजुआ क्षेत्र के कस्बा निवासी स्वामीदयाल के परचून के खोखे से मंगलवार की रात को टॉफी चोरी हो गईं थी। बुधवार को स्वामीदयाल चोरी के शक में गांव के ही 13 साल के आकाश पुत्र स्व. ओमप्रकाश को पकड़कर अपने घर ले आया और पहले खुद पिटाई की फिर पुलिस चौकी पर ले गया। गांव वालों का आरोप है कि वहां पर पुलिस वालों ने भी उसे पीटा। जब इस बात की जानकारी आकाश के घरवालों को हुई तो उसके ताऊ नंदलाल पुलिस चौकी पहुंचे। वहां उन्होंने टॉफी के पैकेट के 150 रुपये देकर आकाश को चौकी से लेकर घर आ गए। आरोप है कि पिटाई से आकाश की तबीयत बिगड़ गई। पहले उसे प्राइवेट डॉक्टर के पास ले गए। तबीयत बिगड़ने पर रविवार की सुबह अस्पताल ले जाया गया, जहां आकाश को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
इससे गुस्साए परिवार के लोगों ने ग्रामीणों के सहयोग से बालक का शव पुलिस चौकी के सामने रखकर राजमार्ग जाम कर दिया। परिवार वालों की मांग थी कि आरोपियों की मदद करने वाले सिपाही और आरोपी को मौके पर लाया जाए। करीब साढ़े तीन घंटे बाद राजमार्ग से शव उठाकर पुलिस चौकी में रख दिया गया। करीब तीन बजे तक गांव वाले चौकी में ही डटे रहे, बाद में मुकदमा लिखे जाने पर मामला शांत हुआ। पुलिस ने आरोपी स्वामीदयाल के खिलाफ धारा 304, 323, 324 और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
मां के अरमानों का नाम था ‘आकाश’
दो साल पहले बीमारी से पिता की मौत हो गई, तो घर चलाने को मां ने गांव छोड़ दिया। वह आकाश से छोटे बेटे को साथ लेकर लखनऊ मजदूरी करने चली गई। आकाश को गांव में ताऊ-ताई के भरोसे छोड़ दिया। अभी होली में मां आई भी और बेटे को ज्यादा न घूमने की नसीहत देकर फिर चली गई। उसे क्या पता था कि बेटे की एक छोटी सी गलती उसकी जान ले लेगी।
बिजुआ गांव के ओमप्रकाश का भरा पूरा परिवार था। तीन बीघा जमीन के सहारे रोजी-रोटी चला रहा था, लेकिन बीमारी से ओमप्रकाश की दो साल पहले मौत क्या हुई, परिवार बिखर गया। जो जमीन रोटी दे रही थी, उसे गिरवीं रखकर ओमप्रकाश के इलाज में पैसा लगता रहा, न ओमप्रकाश की जिंदगी बची और न ही जमीन। ऐसे में घर चलाने की जिम्मेदारी मां रजनी पर आ गई। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी थी। गांव में काम न देखकर मां करीब एक साल से छोटे बेटे सूरज को साथ में लेकर लखनऊ में काम करने लगी। आकाश को ताऊ नंदलाल के भरोसे गांव में ही छोड़ दिया था। होली में रजनी जब घर आई तो आकाश से कहा कि बस कुछ दिन और परेशानी है फिर हम साथ रहेंगे। उसे क्या पता था कि अगली बार यहां उसे बेटे की लाश मिलेगी। बेटे के शव को देखकर रजनी बदहवास हो गई।