यूपी बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने में अभी काफी वक्त है, लेकिन जिले के 7481 परीक्षार्थियों का फेल होना तय हो गया है। ये वह परीक्षार्थी हैं जिन्होंने नकल को लेकर बरती जा रही सख्ती के आगे अपने घुटने टेक दिए। इस साल हाईस्कूल के 4932 और इंटर के 2549 परीक्षार्थी हिंदी विषय की परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए, जबकि नियमानुसार हिंदी विषय की परीक्षा पास होना अनिवार्य है।
बोर्ड परीक्षाएं छह फरवरी से शुरू हुई थीं। हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा की शुरूआत गृह विज्ञान और इंटर की हिंदी के पेपर से हुई थी। हाईस्कूल के हिंदी विषय की परीक्षा में 4932 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे थे, वहीं इंटर के सामान्य हिंदी विषय के पेपर में 721 और हिंदी विषय के पेपर में 1828 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। हिंदी की परीक्षा छोड़ने वाले सभी परीक्षार्थियों का रिजल्ट फेल ही आना है। क्योंकि बोर्ड के नियमानुसार हिंदी विषय की परीक्षा में पास होना जरूरी है और इसमें नंबर कम आने पर ग्रेस मिलने का भी प्रावधान नहीं है।
हिंदी की परीक्षा पास करना है अनिवार्य
डीआईओएस डॉ. आरके जायसवाल का कहना है कि हिंदी विषय की परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। हिंदी में ग्रेस मार्क भी नहीं दिए जाते। जिन छात्रों ने हिंदी की परीक्षा छोड़ दी है वह यदि अन्य विषयों में पास भी हो जाते हैं तो भी फेल ही माने जाएंगे।
2017 के मुकाबले इस बार अधिक हैं परीक्षा छोड़ने वाले
प्रदेश सरकार द्वारा बोर्ड परीक्षा को लेकर कसी जा रहे नकेल को लेकर विद्यार्थी भयभीत हैं, जिसके चलते उन्होंने परीक्षा छोड़ना ही मुनासिब समझा। 2017 की परीक्षा में 4901 ने हाईस्कूल की और 1912 छात्रों ने इंटर के हिंदी विषय की परीक्षा छोड़ी थी। वहीं इस बार हाईस्कूल के 4932 और इंटर के 2549 छात्रों ने परीक्षा छोड़ी है।
वर्ष 2017 2018
हाइईस्कूल 4901 4932
बालक 3122 3261
बालिकाएं 1779 1667
इंटर 1912 2549
बालक 1170 1484
बालिकाएं 745 1065