आजादी के बाद देश में संविधान बनने के बाद पुलिस को आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई। मंशा थी कि पुलिस की मौजूदगी से लोग खुद को सुरक्षित समझेंगे। साथ ही अपराधियों के साथ सख्ती से पेश आएगी, लेकिन जिले में हाल के वर्षों में पुलिस की मिलीभगत से कुछ ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिससे पुलिस का क्रूर चेहरा भी सामने आया है।
चौकी में व्यापारी की पिटाई से गई जान
नवंबर 2011 में ढखेरवा
बाजार के दुकानदार गांव लक्खनपुरवा निवासी रंजीत मौर्या को पुलिस ने उसके
विपक्षियों से साठगांठ कर चौकी पुलिस पकड़ लाई। आरोप लगा कि रात में रंजीत
की चौकी में बेरहमी से पिटाई करने पर उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में
तत्कालीन चौकी प्रभारी राजेंद्र शर्मा समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ
मुकदमा दर्ज किया और आरोपी पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए। रंजीत की मौत के बाद
लोगों का गुस्सा फूट गया। इस दौरान नाराज लोगों ने चौकी में आग लगा दी थी।
थाने में पिटाई से ग्रामीण ने दम तोड़ा
मार्च 2012 में खीरी थाने की पुलिस भाई से विवाद होने पर लोनियनपुरवा गांव में रहने वाले भगवानी, लालजी और दीना को पकड़ लाई। आरोप लगा कि पुलिस ने विपक्षी से साठगांठ कर भगवानी की बेरहमी से पिटाई की गई। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ देर बाद ही उसने दम तोड़ दिया। इस मामले में तत्कालीन एसओ शिवाजी सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
हवालात में पिटाई से अधेड़ की मौत
मई 2014 में शहर के मोहल्ला अर्जुनपुरवा निवासी बृजमोहन अवस्थी को पत्नी से विवाद होने पर सदर कोतवाली पुलिस पकड़ लाई और हवालात में बंद कर दिया। तत्कालीन शहर कोतवाल इश्तियाक अहमद और चौकी इंचार्ज नर्वदेश्वर तिवारी पर आरोप लगा कि बृजमोहन की बेरहमी से पिटाई करने से उसकी मौत हुई। इस मामले में दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। घटना के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर जांच शुरू कर दी गई।