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आखिर कैसे हो स्मार्ट पुलिसिंग?

Tue, 26 Apr 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
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demo pic - फोटो : amar ujala
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चहेते सिपाहियों के तबादले पर लागू नहीं समयावधि की बंदिश
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पहले लंबी लिस्ट बनाकर तबादले फिर संशोधन क्यों
पुलिस आफिस में भी तीन साल से जमे कई सिपाही
स्मार्ट पुलिसिंग के दावे सालों बाद परवान नहीं चढ़ सके हैं। अब पुलिस व्यवस्था में सुधार के प्रयास भी नाकाम हो रहे हैं, क्योंकि तबादला आदेश जारी होने के साथ ही पीछे से संशोधन आदेश भी जारी हो रहे हैं। तीन साल से अधिक समय से एक थाना क्षेत्र में जमे 97 सिपाहियों का तबादला दूसरे थानों में किया गया था, लेकिन अफसरों के चहेते सिपाहियों पर आदेश लागू नहीं हो पा रहा है। तमाम सिपाहियों की रवानगी नहीं हुई है, बल्कि संशोधन आदेश जारी कर चार दिन पहले हुए तबादले निरस्त करने का खेल शुरू हो गया है। 
बता दें चार अप्रैल 2010 में तत्कालीन डीजीपी ने आदेश जारी कर तीन साल या इससे अधिक समय से एक थाने में जमे सिपाहियों का तबादला करने के आदेश दिया था। इसके लिए स्थापना बोर्ड गठित किया गया, जिसकी बैठक में ऐसे सिपाहियों को चिह्नित कर तबादला किया जाता है। स्थापना बोर्ड की बैठक के बाद 19 अप्रैल को दो लिस्ट में 97 और 68 यानी कुल 165 सिपाहियों के तबादले किए गए थे। इसके बाद सिपाहियों में हलचल तेज हो गई, फिर शुरू हुआ जुगाड़ लगाकर तबादला रुकवाने का खेल। सूत्रों की माने तो एएसपी आफिस से सिपाहियों को फोन कर तबादले की सूचना दी गई और तुरंत आफिस में हाजिरी लगाने के लिए कहा गया। इसके बाद तबादला आदेश में संशोधन का दौर शुरू हो गया। इस कड़ी में 24 अप्रैल 2016 को पहली संशोधन लिस्ट भी जारी हो गई है, जिसमें 25 सिपाहियों के तबादले निरस्त कर दिए गए या फिर उसी थाना क्षेत्र की किसी चौकी में तैनाती दे दी गई है। 
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पहले भी नहीं हुआ आदेश पर अमल
करीब आठ माह पूर्व तत्कालीन एसपी अरविंद सेन के समय भी तीन साल से थानों पर जमे सिपाहियों के तबादले दूसरे थानों में किए गए थे, लेकिन उस आदेश पर अब तक अमल नहीं हो सका। चहेते सिपाहियों की थानों से रवानगी नहीं की गई या फिर आदेश में संशोधन करा दिया गया। 

क्यों जरूरी है तबादले
तीन साल या इससे अधिक समय से थानों में जमे सिपाहियों के कुछ लोगों के साथ संबंध प्रगाढ़ हो जाते हैं, जिससे फरियादियों के प्रति भेदभाव की आशंका बन जाती है। ऐसे कई मामलों में सिपाहियों की शिकायतें भी हो चुकी हैं, जिसमें पीड़ित ने उत्पीड़न का आरोप लगाए हैं। 
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कुछ सिपाही ऐसे थे, जिनके रिटायर होने में दो से चार माह तक शेष थे। लिहाजा उनके अनुरोध पर आदेश में संशोधन किया गया हैै। शेष सिपाहियों की हर हाल में तुरंत संबंधित थानों के लिए रवानगी के आदेश दिए गए हैं। यदि इसके अलावा कोई मामला संज्ञान में आता है, तो उस पर एक्शन लिया जाएगा।
-अखिलेश चौरसिया, एसपी 
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